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निजी स्कूलों में महंगी किताबें-यूनिफॉर्म की मनमानी पर विभाग सख्त:स्कूल में स्टेशनरी बेचने पर भी मान्यता भी हो सकती है रद्द


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निजी स्कूलों में महंगी किताबें-यूनिफॉर्म की मनमानी पर विभाग सख्त:स्कूल में स्टेशनरी बेचने पर भी मान्यता भी हो सकती है रद्द

निजी स्कूलों में महंगी किताबें-यूनिफॉर्म की मनमानी पर विभाग सख्त:स्कूल में स्टेशनरी बेचने पर भी मान्यता भी हो सकती है रद्द

झुंझुनूं : झुंझुनूं में निजी स्कूलों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि NCERT या RBSE की बजाय कमीशन के चक्कर में महंगी किताबें खरीदवाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इसके अलावा तीन साल से पहले बिना सूचना ड्रेस बदलने, स्कूल के अंदर जूते, टाई, बेल्ट या स्टेशनरी बेचने और अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या ब्रांड से सामान खरीदने के लिए मजबूर करने पर भी जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है।

बीकानेर शिक्षा निदेशालय के सख्त निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने जिले के सभी निजी स्कूलों में ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में औचक निरीक्षण के लिए टीमों का गठन किया है। 15 अप्रैल तक पूरी जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट 20 अप्रैल को निदेशालय को भेजी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ भारी जुर्माना या मान्यता रद्द जैसी कार्रवाई की जाएगी।

BEO के नेतृत्व में औचक निरीक्षण

निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए जिले में एक शक्तिशाली निगरानी तंत्र तैनात किया गया है। अब ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) की सीधी निगरानी में कमेटियां मैदान में उतरेंगी। प्रत्येक ब्लॉक में BEO स्वयं इस जांच दल का नेतृत्व करेंगे। BEO के अधीन तीन सदस्यीय विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो स्कूलों में जाकर औचक निरीक्षण करेंगी। टीम यह सुनिश्चित करेगी कि स्कूल प्रशासन किसी भी सूरत में अभिभावकों का आर्थिक शोषण न कर सके।

मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुनीता यादव।
मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुनीता यादव।

15 अप्रैल तक जिले के सभी स्कूलों की ‘स्कैनिंग’

शिक्षा विभाग ने जांच की समय-सीमा तय कर दी है। झुंझुनूं के सभी ब्लॉकों में संचालित निजी स्कूलों की सघन जांच के लिए 33 अधिकारियों की टीम को सक्रिय किया गया है। इन टीमों को 15 अप्रैल तक अपनी निरीक्षण रिपोर्ट पूरी करनी होगी। विभाग का लक्ष्य है कि सत्र की शुरुआत में ही इन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

इन चार बातों पर रहेगी पैनी नजर

  • क्या स्कूल किसी विशेष दुकान या ब्रांड से ही सामान खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर कर रहा है?
  • क्या स्कूल के अंदर ही जूते, टाई, बेल्ट या स्टेशनरी बेची जा रही है?
  • क्या बिना तीन साल का अंतराल पूरा किए या बिना सूचना के ड्रेस बदली गई है?
  • क्या NCERT/RBSE के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगाई गई हैं, केवल कमीशन के चक्कर में?

रिपोर्ट 20 अप्रैल तक निदेशालय को भेजी जाएगी

जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निदेशालय ने विशेष ‘परफॉर्मा’ जारी किया है। BEO के नेतृत्व वाली टीमें अपनी रिपोर्ट तैयार कर 20 अप्रैल तक निदेशालय को प्रेषित करेंगी।

मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का व्यवसायीकरण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर स्कूल पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर मान्यता (De-recognition) रद्द भी की जा सकती है।

अभिभावक ऐसे करें शिकायत

यदि झुंझुनूं जिले का कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से सामान लेने के लिए बाध्य करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो आप अपने क्षेत्र के BEO कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

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