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बरसीं बूंदें, नम हुईं आंखें: खाकीजी आश्रम के संत सोमेश मुनि ब्रह्मलीन, हजारों श्रद्धालुओं ने दी अंतिम विदाई


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बरसीं बूंदें, नम हुईं आंखें: खाकीजी आश्रम के संत सोमेश मुनि ब्रह्मलीन, हजारों श्रद्धालुओं ने दी अंतिम विदाई

बरसीं बूंदें, नम हुईं आंखें: खाकीजी आश्रम के संत सोमेश मुनि ब्रह्मलीन, हजारों श्रद्धालुओं ने दी अंतिम विदाई

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : शैलेंद्र पारीक

बेरी : खाकीजी आश्रम के पूज्य संत निर्वाण बाबा सोमेश मुनि का रविवार सुबह 10:15 बजे देवलोकगमन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सोमेश मुनि, पूज्य वासुदेव मुनि के शिष्य थे और पिछले लगभग 25 वर्षों से बेरी धर्मशाला के भजनगढ़ स्थित खाकीजी आश्रम में सेवा, साधना और भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे थे।

महाराज के देवलोकगमन के बाद शाम को उनके अंतिम दर्शन के लिए नगर भ्रमण कराया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं और श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर नम आंखों से अपने प्रिय संत को श्रद्धांजलि दी। महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए भावपूर्ण विदाई दी, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और भावुक हो उठा।

नगर भ्रमण के पश्चात खाकीजी आश्रम परिसर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सोमेश मुनि का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान हुई हल्की बारिश को श्रद्धालुओं ने प्रकृति की श्रद्धांजलि बताया।

अंतिम यात्रा में किसान दास महाराज, सूर्य प्रकाश मुनि, राजाजी पिलानिया, श्याम दास महाराज, राम नारायण दास, अडियल दास महाराज, गोविंद मुनि, प्रकाश मुनि, शिवदास महाराज और रामदास महाराज सहित अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे। वहीं हजारों ग्रामीणों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर संत के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

गौरतलब है कि संत सोमेश मुनि का जन्म उत्तराखंड में हुआ था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, भक्ति और जनसेवा को समर्पित कर दिया। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज एवं श्रद्धालुओं में गहरा शोक व्याप्त है। “संत चले गए, लेकिन उनकी साधना, सेवा और भक्ति की अमिट छाप सदैव श्रद्धालुओं के हृदय में जीवित रहेगी।”

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