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निराधनूं में सात दिवसीय संगीतमय भागवत महोत्सव का भव्य समापन


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निराधनूं में सात दिवसीय संगीतमय भागवत महोत्सव का भव्य समापन

निराधनूं में सात दिवसीय संगीतमय भागवत महोत्सव का भव्य समापन

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अंसार मुज्तर

निराधनूं : निराधनूं में 30 मार्च से 05 अप्रैल तक आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का रविवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ समापन हुआ। इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान विनय कुमार थालोड़ एवं नानची थालोड़ रहे। समापन दिवस पर कथा की पूर्णाहुति के साथ भगवान ठाकुर जी, शालिग्राम जी एवं तुलसी जी का विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

सातवें दिन कथावाचक मानवानंद महाराज (श्रीधाम जनकपुर) ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा की दरिद्रता के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें राजसी सम्मान दिया और बिना मांगे ही उनकी हर इच्छा पूरी की। इसके साथ ही राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया। कथावाचक ने कहा कि सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर राजा परीक्षित ने जीवन को सफल बनाया और अंत में मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि जीवन के अंतिम समय में भी भक्ति से मोक्ष संभव है। भव्य आयोजन और धार्मिक अनुष्ठान नाथासर गांव से भगवान शालिग्राम जी की बारात बैंड-बाजों के साथ दोपहर 3 बजे कथा स्थल पहुंची श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया, महिलाओं ने मंगल गीत गाए। शास्त्रोक्त विधि से तुलसी विवाह संपन्न कराया गया।

समापन पर विशाल महाआरती और महाप्रसादी का आयोजन हुआ। इस महोत्सव को सफल बनाने में ओमप्रकाश भोडीवाल, अमरसिंह प्रजापत, मदनलाल गुरी, लकी, रूप सिंह, उमेद सिंह शेखावत, महेंद्र कुमार दादरवाल, सुरेन्द्र कुमार, संदीप कुमार, कैलाश कुमार, अंजू देवी, संजू देवी सहित समस्त ग्रामवासियों का सराहनीय योगदान रहा। सात दिनों तक चले इस महोत्सव में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। समापन पर सभी ने श्रीमद्भागवत भगवान की आरती कर प्रसाद ग्रहण किया। यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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