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आंधी हो या तूफान डटे रहे बरसात में भी कलम दार


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आंधी हो या तूफान डटे रहे बरसात में भी कलम दार

आंधी हो या तूफान डटे रहे बरसात में भी कलम दार

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

जयपुर/चूरू : राजधानी जयपुर में चल रहे ‌ धरने को एक हफ्ता हो गए लेकिन राजस्थान सरकार की संवेदनहीनता की भी हद हो गयी… ,,लेकिन लगता है इस सरकार ने तो उसे भी पार कर लिया है। प्रदेश का “राजा” सत्ता के महलों में इतना मशगूल है कि उसे सड़क पर बैठे कलमकार दिखाई ही नहीं दे रहे।

जिनकी कलम से सच निकलता है, आज वही सच लिखने वाले धूल और धूप में बैठकर न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं… और सरकार है कि कानों में रूई ठूंसकर बैठी है। उधर देखिए, देवताओं के राजा इंद्र और पवन देव तक बेचैन हो उठे हैं। कभी तेज आंधी भेजते हैं, कभी तूफान… शायद ये सोचकर कि इन कलमकारों को घर लौट जाना चाहिए। पर उन्हें भी क्या पता, ये कोई आम भीड़ नहीं… ये वो लोग हैं जिनकी जिद इतिहास बदल देती है। प्रकृति भी आजमाकर थक जाएगी, लेकिन ये कलमकार नहीं झुकेंगे।

सबसे बड़ा व्यंग्य तो ये है कि समझाने की जिम्मेदारी आसमान उठा रहा है… और जमीन पर बैठा “राजा” अब भी अज्ञान में डूबा है। सवाल सिर्फ इतना है – आखिर इस सत्ता के मद में चूर राजा की आंखें कब खुलेंगी? आंधी आए, तूफान आए, सूरज आग उगले या हालात और कठिन हों… ये कलमकार डटे रहेंगे। क्योंकि ये लड़ाई सिर्फ अपने हक की नहीं, बल्कि उस सच की है जिसे दबाने की हर कोशिश नाकाम होगी। सरकार सुन ले – कलम कभी ना तो झुकी है और ना रुकी हैं। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक ये कलम रुकेगी भी नहीं!

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