विश्व विख्यात ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज ने किया तालछापर सवन्यजीव अभयारण्य का दौरा
’प्रकृति से सीखकर बनाता हूं म्यूजिक’ : रिकी केज
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
रतनगढ़ : तीन बार के ग्रैमी पुरस्कार विजेता भारतीय संगीतकार और पर्यावरणविद् रिकी केज ने शनिवार को ताल छापर कृष्ण मृग अभयारण्य का दौरा किया। इस दौरान पर्यावरणविद् रिकी केज ने अभयारण्य में कृष्ण मृगों की अठखेलियों को करीब से देखा। उन्होंने अभयारण्य के सपाट घास के मैदान की भी सराहना की।
केज ने बताया कि वे मूलतः चूरू जिले के ही हैं, क्योंकि उनके पिता का जन्म चूरू में हुआ था। उन्होंने कहा कि आज वे अपनी जड़ों की ओर लौटे हैं। रिकी केज ने कृष्ण मृग अभयारण्य की प्रशंसा करते हुए प्रकृति के संरक्षण को अत्यंत आवश्यक बताया।
एक संगीतकार के तौर पर रिकी केज ने कहा कि संगीत की उत्पत्ति प्रकृति से ही होती है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने संगीत में केवल प्रकृति को ही महत्व दिया है। ताल छापर के सहायक वन संरक्षक (ACF) क्रांति सिंह और क्षेत्रीय वन अधिकारी (RFO) उमेश बागोतिया ने रिकी केज को अभयारण्य से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की।
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