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गैस-सिलेंडर की कालाबाजारी में राजस्थान में झुंझुनूं का तीसरा नंबर:322 शिकायतों के साथ जयपुर अव्वल; लोग बोले- महंगे दामों पर बेच रहे घरेलू गैस


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गैस-सिलेंडर की कालाबाजारी में राजस्थान में झुंझुनूं का तीसरा नंबर:322 शिकायतों के साथ जयपुर अव्वल; लोग बोले- महंगे दामों पर बेच रहे घरेलू गैस

गैस-सिलेंडर की कालाबाजारी में राजस्थान में झुंझुनूं का तीसरा नंबर:322 शिकायतों के साथ जयपुर अव्वल; लोग बोले- महंगे दामों पर बेच रहे घरेलू गैस

जयपुर : जयपुर और सीकर के बाद झुंझुनूं जिला पूरे प्रदेश में गैस की कालाबाजारी (ब्लैक में बेचना) के मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में गैस सिलेंडरों की भारी कमी चल रही है। रसद विभाग के अफसरों का दावा है कि सप्लाई ठीक है और वे कालाबाजारी रोकने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इस बीच कालाबाजारी के मामलों को लेकर शिकायतों की संख्या बढ़ी है।

11 से 24 मार्च के बीच आई एक रिपोर्ट के अनुसार- जब आम लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहे, तब रसूखदार लोग और बिचौलिए चुपके से सिलेंडरों को महंगे दामों पर बेच रहे हैं।

झुंझुनूं और सीकर की यह है स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार- पूरे राजस्थान में कालाबाजारी की कुल 1,319 शिकायतें मिली हैं। इसमें शेखावाटी के दो जिले सीकर और झुंझुनूं ने टॉप- 3 में जगह बनाई है। स्थिति यह है कि आम उपभोक्ता गैस एजेंसी के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे ‘नो स्टॉक’ या ‘सर्वर डाउन’ का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। वहीं, चोरी-छिपे वही सिलेंडर ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं।

यह है टॉप 3 जिले

  • जयपुर: 322 शिकायतों के साथ पहले नंबर पर।
  • सीकर: 119 शिकायतों के साथ दूसरे नंबर पर।
  • झुंझुनूं: 87 शिकायतों के साथ तीसरे नंबर पर

बुकिंग के लिए भी तरस रहे लोग

कालाबाजारी के अलावा सिलेंडर बुक न हो पाने की समस्या भी सामने आई। प्रदेशभर में 7,122 लोगों ने शिकायत की है कि उनका सिलेंडर बुक ही नहीं हो रहा है।

सीकर में 710 लोगों ने बुकिंग न होने की शिकायत की है। झुंझुनूं और चूरू में भी ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक लोग मोबाइल ऐप और फोन पर बुकिंग करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कंपनियों के सर्वर ठप होने से उन्हें निराशा हाथ लग रही है।

लोग बोले- सिलेंडर नहीं मिल रहे

झुंझुनूं के स्थानीय निवासियों का कहना है- जब हम एजेंसी जाते हैं तो कहा जाता है कि सिलेंडर नहीं है, लेकिन अगर कोई ज्यादा पैसे देने को तैयार हो, तो उसे तुरंत सिलेंडर मिल जाता है। होटलों और ढाबों पर धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन गरीबों को खाना बनाने के लिए सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं।

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