रमजान का महीना मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देता है और बरकतों का महीना है- हमीदा बेगम पूर्व राज्य मंत्री राजस्थान सरकार
रमजान का महीना मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देता है और बरकतों का महीना है- हमीदा बेगम पूर्व राज्य मंत्री राजस्थान सरकार
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय से पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री राजस्थान सरकार हमीदा बेगम ने माहे रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा की माहे रमज़ान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसानियत के लिए रूहानी (आध्यात्मिक), अखलाकी (नैतिक) और जिस्मानी (शारीरिक) सुधार का एक बेहतरीन जरिया है। रमजान के महीने में 30 दिन तक बड़े लेवल पर इफ्तार की तैयारी की जाती है। रमजान को खुदा के महीने के नाम जाना जाता है। रमजान के महीने में पैगंबर- ए -इस्लाम को मेराज पर अल्लाह ने एक तोहफा दिया जिसे पांच वक्त की नमाज कहा जाता है रमजान के महीने मैं गरीब की भूख और प्यास का एहसास होता है। इंसानियत के लिए इसके मुख्य फायदे ।
- नैतिक और चारित्रिक सुधार, सब्र और संयम रोज़ा इंसान को अपनी इच्छाओं और गुस्से पर काबू पाना सिखाता है, जिससे समाज में सहनशीलता बढ़ती है। बुराइयों से तौबा यह महीना इंसान को झूठ, गीबत (चुगली), और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की ट्रेनिंग देता है। अनुशासन सहरी और इफ्तार का वक्त इंसान के जीवन में वक्त की पाबंदी और अनुशासन लाता है।
- सामाजिक एकता और सेवा हमदर्दी और एहसास भूख और प्यास का अनुभव करने से अमीर इंसान को गरीबों और जरूरतमंदों की तकलीफ का एहसास होता है। दान-पुष्प इस महीने में जकात और सदका (दान) देने से समाज के वंचित तबके की आर्थिक मदद होती है, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिलता है, सामूहिक भाईचारा इफ्तार और नमाज-ए-तरावीह के बहाने लोग आपस में मिलते हैं, जिससे आपसी रिश्ते और भाईचारा मज़बूत होता है।
- वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभ डिटॉक्सिफिकेशन: रोज़ा रखने से शरीर के जहरीले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और पाचन तंत्र को आराम मिलता है, ऑटोफैगी प्रक्रिया आधुनिक विज्ञान के अनुसार, उपवास के दौरान शरीर की कोशिकाएं अपनी ही डैमेज कोशिकाओं को साफ करना शुरू कर देती हैं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
- हृदय स्वास्थ्य रोजा रखने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कम होता है, जो दिल की बीमारियों को रोकने में सहायक है।
रमज़ान एक ट्रेनिंग कैंप” की तरह है जो इंसान को एक बेहतर, अनुशासित और नेकदिल इंसान बनने में मदद करता है।
इस्लामी कैलंडर के नौवें महीने, रमज़ान (माहे रमज़ान) को न केवल इबादत और रोज़ों के लिए जाना जाता है, बल्कि यह महीना इस्लामी इतिहास की कई महत्वपूर्ण और निर्णायक घटनाओं का गवाह रहा है।
- कुरान का अवतरण (नुजूल-ए-कुरान) इस्लामी मान्यता के अनुसार, इसी पवित्र महीने की एक रात, जिसे लैलतुल क़द्र (शवे कद्र) कहा जाता है, अल्लाह ने पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) पर पवित्र कुरान नाजिल (अवतरित) करना शुरू किया था।
- बद्र का युद्ध, यह इस्लाम की पहली प्रमुख और निर्णायक सैन्य जीत थी। केवल 313 निहत्थे मुसलमानों ने मक्का के 1,000 से अधिक हथियारों से लैस सैनिकों वाली सेना को हराया था।
- मक्का की विजय, पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) ने बिना किसी बड़े खून-खराबे के 10,000 सहाबा (साथियों) के साथ मक्का में प्रवेश किया और शहर को शांतिपूर्वक जीत लिया।
- हज़रत ख़दीजा (रजि.) का इंतक़ाल ,पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) की पहली पत्नी और ‘उम्मुल मोमिनीन’ (मोमिनों की माँ) हज़रत खदीजा का इंतकाल इसी महीने में हुआ था। उन्हें ‘आम-उल-हुज्न’ (दुःख का वर्ष) के दौरान खो दिया गया था।
- हज़रत अली (रजि.) की शहादत इस्लाम के चौथे खलीफा हज़रत अली इब्न अबी तालिब (रजि.) पर मस्जिद में नमाज़ के दौरान हमला हुआ था और वह शहीद हो गए थे। उसे दिन 21 वा रमजान था।
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