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“रोज़े से चेहरे पर नूर और किरदार में हुस्न पैदा होता है” – हाफिज मोहम्मद अनिस खान


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“रोज़े से चेहरे पर नूर और किरदार में हुस्न पैदा होता है” – हाफिज मोहम्मद अनिस खान

“रोज़े से चेहरे पर नूर और किरदार में हुस्न पैदा होता है” - हाफिज मोहम्मद अनिस खान

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अंसार मुज्तर

निराधनूं : पवित्र रमजान माह के दौरान शुक्रवार को निराधनूं की मदीना मस्जिद में मुस्लिम समुदाय के रोजेदारों ने रमजान के चौथे जुमे की नमाज अकीदत और श्रद्धा के साथ अदा की। नमाज के बाद देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी गई।

मदीना मस्जिद के हाफिज मोहम्मद अनिस खान ने तकरीर करते हुए बताया कि रमजान माह का आखिरी अशरा (दस दिन) चल रहा है और शुक्रवार को 23वां रोजा रखा गया। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में मोमिन एतकाफ कर रहे हैं, वहीं अल सुबह सहरी के साथ दिनभर पांच वक्त की नमाज, कुरान की तिलावत और रात में तरावीह अदा करने से मस्जिदों में रौनक बनी हुई है। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने के लिए मस्जिद पहुंच रहे हैं।

हाफिज अनिस खान ने कहा कि “रोज़े से चेहरे पर नूर और किरदार में हुस्न पैदा होता है।” उन्होंने बताया कि असली खुशहाली हासिल करनी है तो इंसान को अपने नफ्स यानी मन की गुलामी छोड़नी होगी। रोज़े से दिलों में तकवा और परहेज़गारी पैदा होती है और इंसान के जीवन में अनुशासन व सेहत भी बेहतर रहती है।

उन्होंने बताया कि माहे रमजान बेहद बरकतों वाला महीना है, जिसमें नफ्ल इबादत का सवाब 70 गुना तक बढ़ा दिया जाता है। इस पवित्र महीने में दिन हो या रात हर पल इबादत का अवसर होता है। रोजा रखना, इफ्तार करना, तरावीह पढ़ना, सोना और सहरी करना भी इबादत का हिस्सा है।

हाफिज अनिस खान ने बताया कि रमजान के आखिरी अशरे में एक मुबारक रात शब-ए-कद्र आती है, जिसकी इबादत का सवाब हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि शब-ए-कद्र को रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29वीं रातों में तलाश करना चाहिए।

पूर्व सदर अयूब खान खोखर ने बताया कि रमजान का रोजा एक बड़ी इबादत है। इसी मुबारक महीने में अल्लाह ने इंसानों को सीधा रास्ता दिखाने के लिए अपनी आखिरी किताब कुरान पाक नाजिल की, जो इंसानियत की हिदायत और रहनुमाई का जरिया है। रमजान के रोजे इंसान को संयम, सब्र और इंसानियत की राह पर चलने की ट्रेनिंग देते हैं।

इस दौरान घरों में महिलाएं भी रोजे रखकर इबादत कर रही हैं और लोग जगह-जगह रोजा इफ्तार करवाकर नेक कामों में हिस्सा ले रहे हैं।— हनीफ सया

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