विश्व उपभोक्ता दिवस विशेष : पीड़ितों की आवाज बन रहा उपभोक्ता आयोग
विश्व उपभोक्ता दिवस विशेष : पीड़ितों की आवाज बन रहा उपभोक्ता आयोग
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं : विश्व उपभोक्ता दिवस (15 मार्च) के अवसर पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने कहा कि प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में उपभोक्ता है और बाजार व्यवस्था की धुरी भी उपभोक्ता ही है। उपभोक्ता जितना जागरूक होगा, बाजार व्यवस्था उतनी ही पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
उन्होंने कहा कि भारत में उपभोक्ता अधिकारों की मजबूत नींव 24 दिसंबर 1986 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के माध्यम से रखी गई थी। समय के साथ बदलती परिस्थितियों को देखते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 लागू किया गया, जो 20 जुलाई 2020 से प्रभावी है। इस कानून ने उपभोक्ताओं को अधिक अधिकार और उपभोक्ता आयोगों को प्रभावी शक्तियां प्रदान की हैं।
मील ने बताया कि इस कानून के लागू होने के बाद उपभोक्ता आयोग पीड़ित और शोषित वर्ग की आवाज बनकर सामने आए हैं। आयोग के निर्णयों से आम नागरिकों को त्वरित और प्रभावी न्याय मिल रहा है। झुंझुनूं जिले में भी उपभोक्ता आयोग आमजन के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला उपभोक्ता आयोग झुंझुनूं में लंबित परिवादों और प्री-लिटिगेशन प्रार्थना पत्रों सहित कुल 133 मामलों का आपसी समझाइश से निस्तारण किया गया, जिससे कई उपभोक्ताओं को राहत मिली।
मील ने कहा कि जागरूक उपभोक्ता ही स्वस्थ और पारदर्शी बाजार व्यवस्था का आधार होता है। प्रत्येक नागरिक को वस्तुएं या सेवाएं लेते समय बिल लेना चाहिए, नियम व शर्तों को समझना चाहिए और किसी भी प्रकार के शोषण की स्थिति में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने अपील की कि विश्व उपभोक्ता दिवस के अवसर पर सभी नागरिक “उपभोक्ता देवो भवः” की भावना को अपनाते हुए जागरूक उपभोक्ता बनें और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
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