[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

रोजा और मेटाबोलिज्म – न्यूट्रिशनिस्ट साइमा


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
चूरूटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

रोजा और मेटाबोलिज्म – न्यूट्रिशनिस्ट साइमा

रोजा और मेटाबोलिज्म - न्यूट्रिशनिस्ट साइमा

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय स्थित साइमा (डाइटिशियन & न्यूट्रिशनिस्ट) ने ‌ माहे रमजान की मुबारकबाद पेश की ओर बताया कि रोजा (उपवास) और मेटाबोलिज्म के बीच गहरा संबंध है। रोजा के दौरान शरीर को भोजन और पानी से कुछ समय के लिए दूर रखा जाता है, जिससे शरीर के मेटाबोलिज्म में कई बदलाव होते हैं।

रोजा के दौरान होने वाले मेटाबॉलिक बदलाव

  • ग्लूकोज का स्तरः रोजा के दौरान शरीर को ग्लूकोज की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर कम होता है।
  • केटोसिस: जब शरीर को पर्याप्त ग्लूकोज नहीं मिलता, तो शरीर वसा को ऊर्जा के स्रोत के रूप में उपयोग करना शुरू करता है, जिससे केटोन्स बनते हैं।
  • वसा जलनाः रोजा के दौरान शरीर वसा को जलाने लगता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है।
  • मेटाबॉलिक दरः रोजा के दौरान शरीर की मेटाबॉलिक दर थोड़ी धीमी हो सकती है, जिससे शरीर ऊर्जा की बचत करता है। 5.
  • हार्मोनल बदलावः रोजा के दौरान शरीर में इंसुलिन और ग्लूकागन जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव होते हैं।
    रोजा के मेटाबॉलिक लाभ
  • वजन कम करने में मददः वसा जलने की प्रक्रिया के कारण वजन कम करने में सहायता मिलती है। कैंसर के खतरे में कमीः रोजा रखने से शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव कम हो सकता है। ऑटोफैजी, जिससे कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।
  • नसिक स्वास्थ्य में सुधारः रोजा से मानसिक शांति मिलती है और तनाव व चिंता को कम करने में मदद मिलती है। पाचन तंत्र में सुधारः रोजा पाचन तंत्र को आराम देता है और पाचन से जुड़ी समस्याओं में सुधार ला सकता है।
  • इम्यून सिस्टम में सुधारः नियमित रोजा से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हो सकती है। त्वचा के स्वास्थ्य में सुधारः रोजा शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है, जिससे त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
  • आत्म-नियंत्रण और अनुशासनः रोजा रखने से आत्म-नियंत्रण और अनुशासन की भावना मजबूत होती है।
  • इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधारः रोजा इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है। हृदय स्वास्थ्य में सुधारः रोजा से हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • सूजन में कमीः रोजा शरीर में सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है।
    साइमा (डाइटिशियन & न्यूट्रिशनिस्ट) के अनुसार, रोजा रखते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए सेहरी और इफ्तार में संतुलित और पौष्टिक भोजन लिया जाए।

Related Articles