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14 मार्च को जयपुर में फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस की राष्ट्रीय कार्यशाला


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14 मार्च को जयपुर में फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस की राष्ट्रीय कार्यशाला

स्व-वित्तपोषित संस्थानों की संस्थागत स्थिरता के लिए एकजुट होना जरूरी : डॉ. अंशु कटारिया

जयपुर : देशभर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों के हितों के संरक्षण और उनसे जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाली राष्ट्रीय संस्था फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस (FSFTI) द्वारा 14 मार्च को जयपुर के रेडिसन ब्लू होटल में एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।

कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में एफएसएफटीआई के सचिव डॉ. के.वी.के. राव उपस्थित रहेंगे। आयोजन समिति में आर्य ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के चेयरमैन डॉ. अरविंद अग्रवाल, सिविल वॉलेट फाउंडेशन के संस्थापक विक्रम सिंह कविया, जनसंपर्क विशेषज्ञ विक्रम राठौड़ तथा आरईसीएस के सचिव श्रीधर सिंह आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।

इस कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न तकनीकी शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, निदेशक, शिक्षाविद और तकनीकी शिक्षा से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और संस्थागत सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अंशु कटारिया तथा कार्यशाला आयोजक आर्य ग्रुप ऑफ कॉलेजेस जयपुर के अध्यक्ष डॉ. अरविंद अग्रवाल ने बताया कि कार्यशाला में राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कोटा और बीकानेर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बीकानेर से संबद्ध महाविद्यालयों सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों को आमंत्रित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान तकनीकी शिक्षण संस्थानों के समक्ष वर्तमान में आ रही समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस कार्यशाला में सहभागिता पूर्णत: नि:शुल्क रखी गई है।

डॉ. अंशु कटारिया ने बताया कि भारत भर के लगभग 10,000 स्व-वित्तपोषित गैर-सहायता प्राप्त तकनीकी कॉलेजों को एक राष्ट्रीय मंच पर एकजुट करने का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक ज्ञान और तकनीकी शिक्षा केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि स्व-वित्तपोषित संस्थान भारत की उच्च और तकनीकी शिक्षा की रीढ़ हैं, इसलिए उनकी संस्थागत स्थिरता और सशक्तिकरण के लिए सभी संस्थानों का एकजुट होना जरूरी है।

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