सीकर में 800 साल पुराना संरक्षित स्मारक बनी खंडहर:ओवल दे-सोवल दे मंदिर का मरम्मत कार्य 5 साल से रुका, मूर्तियां भी हुई चोरी
सीकर में 800 साल पुराना संरक्षित स्मारक बनी खंडहर:ओवल दे-सोवल दे मंदिर का मरम्मत कार्य 5 साल से रुका, मूर्तियां भी हुई चोरी
खंडेला : सीकर जिले के खंडेला कस्बे के पास सलेदीपुरा गांव में स्थित 800 साल से ज्यादा पुराना ओवल दे, सोवल दे सती मंदिर अब खंडहर में तब्दील हो रहा है। यह मंदिर अरावली की सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी में अपनी अनूठी कलाकृति विरासत को संजोए हुए है।
5 सालों से बंद पड़ा है मरम्मत का काम
पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया था और करीब 4-5 साल पहले इसके संरक्षण व मरम्मत का काम शुरू किया था। हालांकि, यह काम बीच में ही रोक दिया गया, जिससे मंदिर का कुछ हिस्सा जर्जर होता जा रहा है।
मंदिर में लगी मूर्तियां भी हुई चोरी
वर्ष 2013 में सरकार ने इस स्मारक के लिए 32 लाख रुपए का बजट भी आवंटित किया था। संरक्षण के अभाव में मंदिर में लगी मूर्तियां भी चोरी हो चुकी हैं।
मंदिर के बारे में एक मान्यता है कि पाटन के चौहान राजपूत राजा की बेटी ओवल दे का विवाह गढ़चौटालिया के राजा बालेश्वर सिंह से हुआ था। एक दिन राजा का छोटा भाई खेम सिंह जंगल से खरगोश का शिकार कर लाया और अपनी भाभी ओवल दे के पास उसकी कोमलता की तारीफ करने लगा।
इस पर ओवल दे ने अपनी छोटी बहन सोवल दे को खरगोश से भी ज्यादा कोमल बताया। यह सुनकर देवर खेम सिंह के मन में सोवल दे को देखने की इच्छा हुई, जिसे उसने अपनी भाभी के समक्ष रखा।
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