रोजा सिर्फ इबादत नहीं, सेहत का भी रहस्य – डॉ. अख्तर खान BPT फिजियोथेरेपिस्ट
रोजा सिर्फ इबादत नहीं, सेहत का भी रहस्य - डॉ. अख्तर खान BPT फिजियोथेरेपिस्ट
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर डॉ अख्तर खान B P T फिजियोथैरेपिस्ट निदेशक स्टे रिलैक्स्ड फिजियोथैरेपी हॉस्पिटल भरतीया कुएं के सामने नई सड़क चूरू ने माहे रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा की रमजान का पाक महीना मुस्लिम समुदाय के लिए खास अहमियत रखता है. यह सिर्फ इबादत और आत्मसंयम का समय नहीं है कोलेस्ट्रॉल कम करने से लेकर मानसिक शांति तक के फायदे है। यह सिर्फ इबादत और आत्मसंयम का समय नहीं है. बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद फायदेमंद माना जाता हैं ।
रमजान के दौरान रखे जाने वाले रोजा (उपवास) से शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. उन्होंने कहा कि इस दौरान उपवास रखने से शरीर को डिटॉक्स करने का अवसर मिलता है. जिससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है और मोटापे व गैस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है.शरीर के लिए फायदेमंद है रोजा डॉ. अख्तर खान के अनुसार, वर्ष भर शरीर में जो अतिरिक्त ऊर्जा और चर्बी जमा होती रहती है. रोजा रखने से उसे नियंत्रित करने में मदद मिलती है. यह एक तरह से शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को तेज करता है. पाचन तंत्र को आराम देता है. इसके अलावा, ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है। जिससे मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है।
तरावीह से भी मिलता है स्वास्थ्य लाभ रमजान में विशेष रूप से अदा की जाने वाली तरावीह की नमाज न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है. नमाज पढ़ने के दौरान जो हरकतें होती हैं. वे एक प्रकार के हल्के व्यायाम का काम करती हैं. इससे मांसपेशियों में लचीलापन आता है. जोड़ों का दर्द कम होता है और रक्त संचार बेहतर होता है. डॉ खान ने बताया कि वैज्ञानिक शोध भी यह साबित कर चुके हैं। कि नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधियां हृदय और मस्तिष्क के लिए फायदेमंद होती है.मानसिक और आध्यात्मिक लाभ भी मिलता है। रोजा केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाये रखने में भी सहायक है।
उपवास से आत्मसंयम बढ़ता है. जिससे तनाव और चिंता कम होती है. रमजान के दौरान लोग अधिक धैर्यवान और संवेदनशील बनते हैं. जिससे सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते भी मजबूत होते हैं। रमजान के महीने में दान -पुण्य का भी बड़ा ही महत्व है। धनवान लोग अपनी कमाई का ढाई परसेंट दान निकलते हैं और गरीबों की सहायता करते हैं। माहे रमजान के पूरे रोजे रखने के बाद में अल्लाह ताला तोहफे के रूप में ईद का त्योहार देता है जो खुशियों और सांप्रदायिक सौहार्द भाई चारे का प्रतीक है।
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