नीमकाथाना में दरगाह का रास्ता बंद करने का आरोप:एसडीएम को दिया ज्ञापन, वन विभाग ने कहा-फॉरेस्ट की जमीन पर नर्सरी बनाई
नीमकाथाना में दरगाह का रास्ता बंद करने का आरोप:एसडीएम को दिया ज्ञापन, वन विभाग ने कहा-फॉरेस्ट की जमीन पर नर्सरी बनाई
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अशोक सिंह शेखावत
नीमकाथाना : नीमकाथाना के भूदोली गांव में कल्लूशाह पीर बाबा की दरगाह के आम रास्ते को बंद करने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी राजवीर यादव को ज्ञापन सौंपकर रास्ते को यथावत रखने और दरगाह क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्य को रोकने की मांग की।
पौधे लगाने और चारदीवारी की कोशिश
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया-कल्लूशाह पीर बाबा की दरगाह और कब्रिस्तान कई दशकों से यहां स्थित है। वर्ष 1965 से एक बीघा भूमि वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है। हालांकि, अब वन विभाग द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से दरगाह की भूमि पर नर्सरी के पौधे लगाने और चारदीवारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
वन विभाग की कार्रवाई को बताया भेदभावपूर्ण
ग्रामीणों के अनुसार, कल्लूशाह पीर बाबा की इस पवित्र दरगाह में सभी धर्मों के लोगों की आस्था है और वे यहां आते-जाते रहते हैं। वन विभाग की इस कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताया गया है। इस जमीन पर सालाना उर्स का बड़ा मेला आयोजित होता है, जिसमें लगभग 20-25 हजार श्रद्धालु, जिनमें सभी धर्मों और मुस्लिम समाज के लोग शामिल हैं, आते हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दरगाह की भूमि के पूर्वी तरफ स्थित गेट और पूर्व-पश्चिम रास्ते को अवैध रूप से बंद किया जा रहा है, जिससे समाज में काफी रोष है। उन्होंने यह भी बताया कि यह भूमि पाटन दरबार उदय सिंह महाराज द्वारा कल्लूशाह पीर बाबा की दरगाह को दी गई थी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वन विभाग द्वारा जमीन और आम रास्ते पर किए जा रहे कथित अवैध कब्जे को रोका जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग द्वारा जबरन रास्ते को रोका गया, तो ग्रामीणों द्वारा आंदोलन किया जाएगा।
रेंजर बोले-वन विभाग की जमीन पर नर्सरी की स्थापना
रेंजर जोगेंद्र सिंह ने बताया-पीर बाबा की दरगाह जिस जगह पर स्थापित है, वह जगह फारेस्ट की है। कुछ लोग मेरे पास भी आए थे। उस फारेस्ट की जगह पर वन विभाग की नर्सरी स्थापित की जा रही है। उसकी लेकर कार्य किया जा रहा है।
ये रहे मौजूद
इस दौरान पार्षद शाकिर अली, मुकेश सैनी, हरफूल मीणा, अब्दुल रहमान, अब्दुल सत्तार, बजरंग लाल, ईदू लुहार, रामकुंवर सिंह, इकबाल लाला, हरचंद चौधरी, हाफिज शाहरुख खान, अजीज, बाबू, महावीर, मदन नट, मासिन खान, फत्तू खान सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
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