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झुंझुनूं में गूंजा ‘हिंदू राष्ट्र’ का प्रखर स्वर, संतों के सानिध्य में हुआ वैचारिक महासंगम


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झुंझुनूं में गूंजा ‘हिंदू राष्ट्र’ का प्रखर स्वर, संतों के सानिध्य में हुआ वैचारिक महासंगम

झुंझुनूं में गूंजा ‘हिंदू राष्ट्र’ का प्रखर स्वर, संतों के सानिध्य में हुआ वैचारिक महासंगम

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ सोमवार को झुंझुनूं में “हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। संतों के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में धर्माचार्यों, सामाजिक संगठनों और सर्व समाज के लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

यह संगोष्ठी सोमवार शाम पांत का अखाड़ा, शनि मंदिर परिसर, गौशाला रोड स्थित झुंझुनूं अकादमी स्कूल के पास आयोजित हुई। इसमें पुरी शंकराचार्य परंपरा के कृपापात्र शिष्य, ‘विश्व ब्राह्मण भूषण’ से सम्मानित तथा आदित्य वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद झा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

प्रेमचंद झा ने अपने उद्बोधन में सनातन धर्म की रक्षा, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि बताते हुए समाज को जागरूक और संगठित रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन की एक शाश्वत व्यवस्था है, जो राष्ट्र को सांस्कृतिक शक्ति और सामाजिक समरसता प्रदान करती है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से आए लोगों ने राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक एकता जैसे विषयों पर विचार व्यक्त किए।

आयोजकों ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य एक सुसंस्कृत, शिक्षित, सुरक्षित और समरस समाज के निर्माण का संकल्प मजबूत करना है, ताकि सनातन मूल्यों के आधार पर राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ किया जा सके।

कार्यक्रम का आयोजन विप्र सेना राजस्थान, पुजारी सेवक महासंघ झुंझुनूं तथा सर्व समाज के तत्वावधान में किया गया।

संगोष्ठी के संयोजक गुलझारी लाल शर्मा, विनोद पुजारी और महेश बसावतिया ने बताया कि यह आयोजन समाज में सकारात्मक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाने का प्रयास है, जो भविष्य में सामाजिक एकता और राष्ट्रहित की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर विशेष धर्म अधिकारी रामानंद जी पाठक, पवन पुजारी, श्याम सुंदर लालपुर, गणेश चैतन्य महाराज मंडावा, हरिकिशन शुक्ला, रघुनाथ पोद्दार और समाजसेवी गायत्री शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भावना शर्मा ने किया।

संगोष्ठी के दौरान उपस्थित लोगों ने सनातन संस्कृति की रक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प भी लिया।

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