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निराधनूं में सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाह, हर घर से घी एकत्र कर हुआ होलिका दहन


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निराधनूं में सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाह, हर घर से घी एकत्र कर हुआ होलिका दहन

निराधनूं में सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाह, हर घर से घी एकत्र कर हुआ होलिका दहन

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : अंसार मुज्तर

निराधनूं : झुंझुनूं जिले के निराधनूं गांव में होली पर्व पर सैकड़ों वर्षों पुरानी अनूठी परंपरा आज भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए हर घर से घी एकत्र कर होलिका दहन किया जाता है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, कई सौ वर्ष पहले होली के आसपास गांव में किसी न किसी घर में आग लग जाती थी। तब गांव में आए एक साधु ने सुझाव दिया कि यदि होली पर प्रत्येक घर चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम से घी एकत्र कर होली में हवन (होम) किया जाए और उसी घी से होलिका दहन किया जाए, तो आग की घटनाओं से मुक्ति मिलेगी।

ग्रामीणों ने इस उपाय को अपनाया और मान्यता है कि उसके बाद से गांव में होली के समय घरों में आग लगने की घटनाएं बंद हो गईं। तभी से यह परंपरा हर वर्ष निभाई जा रही है। गांव के हरिराम महला ने बताया कि यह टोटका अब एक परंपरा बन चुका है और गांव की एकता का प्रतीक है। निराधनूं के लीलाधर नाथ पिछले करीब 40 वर्षों से इस परंपरा के तहत हर घर से घी एकत्र करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

निराधनूं में होलिका दहन स्थल पर पूर्व खरीफ फसल के लिए शगुन लेती ग्रामीण महिलाएं

ऐसे होती है घी एकत्र करने की प्रक्रिया
होलिका दहन से पहले पंचायत की ओर से मुनादी करवाई जाती है। ढोल बजाते हुए मुनादी करने वाला आगे चलता है और उसके पीछे घी एकत्र करने वाली टीम। जैसे ही मुनादी होती है, घरों के लोग दरवाजे पर घी लेकर तैयार हो जाते हैं। लीलाधर नाथ बड़े बर्तन में सभी घरों से घी एकत्र करते हैं। हिंदू और मुस्लिम सभी परिवार इसमें भागीदारी निभाते हैं। एकत्रित घी की मात्रा करीब एक मण से अधिक हो जाती है।

होलिका दहन के दिन गांव के नत्थाराम खीचड़ पूजा के लिए कुछ घी अलग रखते हैं और शेष घी होली में हवन के रूप में अर्पित किया जाता है। गांव के पंच इकबाल खोखर ने बताया कि उस समय ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह परंपरा शुरू करने का निर्णय लिया था, जो आज भी निरंतर जारी है। निराधनूं गांव की यह परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सामूहिक एकजुटता की अनूठी मिसाल भी पेश करती है।

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