रमजान का पहला असरा हुआ पूरा, आज से दूसरा शुरू
रोजेदारों की बदली दिनचर्या
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद आरिफ चंदेल
इस्लामपुर : रहमतों एवं बरकतों के महीने रमजान का पहला असरा शनिवार को पूरा हो गया है और रविवार से दूसरा असरा शुरू होगा। इन दिनों रमजान का मुबारक महीना चल रहा है। इस मुबारक महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रब की रजा के लिए इबादत में लगे हुए हैं। अलसुबह से देर रात तक इबादतों का दौर चल रहा है। रमजान के मुकद्दस महीने को तीन असरों में बांटा गया है। पहला असरा रहमत का दूसरा मगफिरत का और तीसरा असरा जहन्नुम से आजादी पाने का है। रमजान माह के पहले दस दिन यानी रहमत का पहला असरा शनिवार को पूरा1 हो गया है और रविवार से दूसरा असरा मगफिरत का शुरू हो गया है। लोगों ने पहले असरे में रोजे रखकर व अल्लाह का जिक्र करके बेइंतहा रब की रहमत लूटी। जो इंसान इस मुबारक महीने में गफलत में सोए हुए हैं उनके लिए अब भी मौका है कि वो गफलत से बेदार होकर रब की रजा के लिए खूब इबादत करके अपनी मगफिरत कराएं। जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अकबर अली व मदीना मस्जिद के इमाम मौलाना उमर ने आमजन से गरीबों व जरूरतमंदों की ज्यादा से ज्यादा मदद करने की अपील की है।
रमजान में बदल गई दिनचर्या
रहमतों एवं बरकतों के इस मुबारक महीने में रोजेदारों की दिनचर्या बदल गई है। अलसुबह से लेकर देर रात तक इबादतों का दौर चल रहा है। तड़के साढे तीन बजे उठकर दैनिक कार्यों से फारिग होने के बाद सेहरी के समय से ही इबादतों का दौर शुरू हो जाता है। दिनभर लोग रोजे रखकर इबादत करते है। नमाज के साथ कलामे पाक की तिलावत, तस्बीह तहरीमा, दरुदो सलाम, नफ्ल नमाज व जिक्रे इलाही करते हुए लोग इबादत में मशगूल रहते है। रमजान में सेहरी और इफ्तार के साथ ही तरावीह की अहमियत होने से लोग रात को ईशा की नमाज के बाद तरावीह पढते हैं। महिलाओं को सेहरी के लिए खाना बनाने के लिए और भी जल्दी उठना पड़ता है। देर रात तक जागना और तड़के जल्दी उठना मुस्लिम भाइयों की दिनचर्या में शामिल हो गया है।
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