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इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा आयोजित “इटर्नल स्ट्रक्चरल इंडिया समिट 2026” सफलतापूर्वक संपन्न


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इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर द्वारा आयोजित “इटर्नल स्ट्रक्चरल इंडिया समिट 2026” सफलतापूर्वक संपन्न

वॉल्व रिप्लेसमेंट के बाद अब डिवाइस क्लोजर से 10–15 मिनट में चल-फिर सकेंगे मरीज, पहले 12 घंटे से 1 दिन तक करना पड़ता था इंतजार, देश-विदेश के 120 विशेषज्ञों ने नवीनतम तकनीकों पर किया मंथन

जयपुर : इटर्नल हॉस्पिटल द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस “इटर्नल स्ट्रक्चरल इंडिया समिट 2026” सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में देश-विदेश से आए 120 से अधिक हृदय रोग विशेषज्ञों ने ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट (TAVR) तकनीक में हुए नवीनतम एडवांसमेंट और जटिल मामलों के प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की।

सम्मेलन में बताया गया कि जांघ के रास्ते बिना ओपन सर्जरी के किए जाने वाले वॉल्व रिप्लेसमेंट (TAVR) के बाद अब मरीजों को लंबे समय तक सीधा लेटे रहने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले बड़ी नस (फेमोरल आर्टरी) में पंक्चर के कारण मरीजों को 12 घंटे से 24 घंटे तक आराम करना पड़ता था, लेकिन अब नई डिवाइस क्लोजर तकनीक से पंक्चर साइट को मात्र 10–15 मिनट में सील किया जा सकता है। इससे मरीज प्रक्रिया के तुरंत बाद चल-फिर सकते हैं।

कॉन्फ्रेंस के कोर्स डायरेक्टर डॉ. प्रशांत द्विवेदी (इटर्नल हॉस्पिटल) ने बताया कि विभिन्न क्लोजर डिवाइसेज की लाइव डेमोंस्ट्रेशन डॉ. नागेन्द्र भूपति और डॉ. परासुराम एम. कृष्णमूर्ति ने दी। बायकस्पिड एओर्टिक वॉल्व में TAVR की बारीकियों पर डॉ. नागेन्द्र भूपति ने अपने प्रैक्टिकल टिप्स साझा किए।

“कोरोनरी ऑब्स्ट्रक्शन को कैसे एंटिसिपेट और बेलआउट करें” विषय पर डॉ. प्रेम रतन डेगावत (इटर्नल हॉस्पिटल) ने जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने की रणनीति समझाई। वहीं “पोस्ट TAVR कोरोनरी इंटरवेंशन” विषय पर इटर्नल हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. समीन शर्मा ने अपने विचार रखे। अंत में सभी फैकल्टी के साथ ओपन डिस्कशन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सीधे विशेषज्ञों से संवाद किया।

TAVR के तुरंत बाद मरीज को मिल रही राहत

डॉ. परासुराम कृष्णमूर्ति ने बताया कि “एंजियोसील” नामक डिवाइस क्लोजर तकनीक से जांघ की बड़ी नस में किए गए पंक्चर को तुरंत बंद किया जा सकता है। इस तकनीक में आर्टरी के अंदर एक बायोएब्जॉर्बेबल एंकर और बाहर की ओर कोलेजन प्लग लगाया जाता है, जो स्यूचर से जुड़े होते हैं। स्यूचर को खींचते ही अंदर और बाहर के हिस्से आर्टरी की दीवार को सील कर देते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में रक्तस्राव रुक जाता है और लंबे समय तक दबाव देने की आवश्यकता नहीं रहती।

25 साल तक टिकाऊ नई पीढ़ी के हार्ट वॉल्व

डॉ. समीन शर्मा ने जानकारी दी कि अब नई पीढ़ी के बायोप्रोस्थेटिक हार्ट वॉल्व उपलब्ध हैं, जिनमें विशेष टिश्यू का उपयोग किया गया है। इन पर कैल्शियम जमाव बेहद धीमा होता है, जिससे ये सामान्य वॉल्व की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और लगभग 25 वर्षों तक कार्य कर सकते हैं।

इन वॉल्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इन्हीं के अंदर नया वॉल्व इंप्लांट किया जा सकता है, जिससे बड़े ऑपरेशन से बचाव संभव है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के साथ इटर्नल हॉस्पिटल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जयपुर में अत्याधुनिक हृदय उपचार सुविधाएं और वैश्विक स्तर की चिकित्सा विशेषज्ञता उपलब्ध है।

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