[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता – अभिषेक सुराणा


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
चूरूटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता – अभिषेक सुराणा

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमीनार का किया पर्यवेक्षण, किसानों से किया संवाद

चूरू : जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित आत्मा परियोजना सभागार में राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमीनार का पर्यवेक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित किसानों से सीधा संवाद कर उद्यानिकी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

जिला कलक्टर सुराणा ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि के लिए परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है। बदलते जलवायु परिदृश्य और सीमित जल संसाधनों को देखते हुए कृषकों को आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए परंपरागत फसलों के साथ औषधीय एवं मसाला पौधों को बढ़ावा देने की बात कही।

सूक्ष्म सिंचाई अपनाने पर दिया जोर

सुराणा ने कहा कि जिले में अधिकांश क्षेत्रों में खारा पानी और विविध प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। सिंचित क्षेत्रों में अधिक पानी के उपयोग से मिट्टी व फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए किसान मिनी ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियां अपनाएं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत चूरू जिले का चयन किया गया है। ऐसे में किसानों को एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत उत्पादकता बढ़ाने के साथ वैल्यू एडिशन पर ध्यान देना चाहिए। राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं में उपलब्ध अनुदान का लाभ लेकर स्थानीय स्तर पर वेयरहाउस, प्रसंस्करण इकाइयां एवं मार्केटिंग विकल्प विकसित किए जाएं।

कृषि के साथ उद्यमिता को बढ़ावा

उन्होंने युवा किसानों से दलहन-तिलहन प्रोसेसिंग व उत्पादों की ट्रेडिंग स्वयं करने का आह्वान किया, ताकि कृषि के साथ उद्यमिता को भी बढ़ावा मिल सके। उद्यानिकी उपनिदेशक डॉ. धर्मवीर डूडी ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों से जल की बचत के साथ उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि संभव है। सेमीनार में आधुनिक तकनीकों, उन्नत किस्मों, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा कीट-रोग नियंत्रण पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण दिए।

किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सहित विभिन्न योजनाओं, संरक्षित खेती, ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई और गुणवत्तापूर्ण बागवानी उत्पादन के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही किसानों की समस्याएं व सुझाव भी सुने गए। इस अवसर पर रामावतार शर्मा, मोतीलाल, सविता बुडानिया सहित अन्य किसान व विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles