सिंधु जल समझौते का पानी काटली में प्रवाहित करने की मांग, मुख्यमंत्री से मिले जन अभियान संयोजक
काटली नदी पुनर्जीवन को लेकर सौंपा विस्तृत मांग पत्र, शेखावाटी की 80 लाख आबादी को मिलेगा लाभ
जयपुर/झुंझुनूं : काटली नदी को पुनर्जीवित करने और शेखावाटी क्षेत्र की जल समस्या के स्थायी समाधान को लेकर काटली नदी बचाओ जन अभियान के संयोजक सुभाष कश्यप ने सोमवार को जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से उनके राजकीय आवास पर आयोजित जनसुनवाई में मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा।
सुभाष कश्यप ने मांग की कि सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को दिया जाने वाला पानी, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत सरकार द्वारा रद्द किया गया था, उसे काटली नदी में बांध निर्माण कर पाइपलाइन के माध्यम से प्रवाहित किया जाए, जिससे सूखी पड़ी काटली नदी को पुनः जीवन मिल सके।
नदी क्षेत्र में वृक्षारोपण व सीमांकन की मांग
सरस्वती रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट सोसाइटी झुंझुनूं के अध्यक्ष सुभाष कश्यप ने मांग पत्र में बताया कि काटली नदी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए जी-राम-जी योजना के माध्यम से वृक्षारोपण, समतलीकरण, सीमांकन और अन्य उपयोगी कार्य कराए जाएं।
नदियों को जोड़ने और जल दोहन नियंत्रण का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री को सौंपे पत्र में केंद्र सरकार से चंबल, काली सिंध, पार्वती, लूणी, साहबी, घग्घर, काटली, सोती, बनास और बाण जैसी नदियों को आपस में जोड़ने, नदी बहाव क्षेत्रों में अनियंत्रित जल दोहन पर रोक, ड्रोन द्वारा कृत्रिम वर्षा, तथा काटली नदी की 1947 की राजस्व रिकॉर्ड स्थिति बहाल करने की मांग की गई।
इसके साथ ही आसपास की बंजर, चारागाह और वन विभाग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर काटली नदी क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
अतिक्रमण रोकने की प्रभावी नीति की जरूरत
कश्यप ने बताया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के आदेश पर काटली नदी से अतिक्रमण हटाने का महाअभियान चल रहा है। उन्होंने सरकार से भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए सख्त और स्थायी व्यवस्था लागू करने तथा काटली नदी के सहायक नालों व जल स्रोतों को भी अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की।
प्रभावितों के पुनर्वास की भी मांग
अतिक्रमण हटाने और आवंटन निरस्त होने से प्रभावित लोगों की आजीविका के लिए पुनर्वास या आर्थिक सहायता देने का आग्रह भी मुख्यमंत्री से किया गया।
वैदिक काल से जुड़ा है काटली नदी का इतिहास
सुभाष कश्यप ने बताया कि काटली नदी वैदिक काल में जयपुर जिले के शाहपुरा से निकलकर वर्तमान के सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर होते हुए सिंधु नदी में मिलती थी। यह क्षेत्र की प्रमुख जलधारा थी और इसके किनारे ताम्रकालीन गणेश्वर और सुनारी सभ्यता विकसित हुई थी, जिसका संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से रहा है। उन्होंने कहा कि काटली नदी के पुनर्जीवित होने से शेखावाटी क्षेत्र की 80 लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
राजस्थान नदी एवं जल संरक्षण आयोग बनाने की मांग
कश्यप ने राज्य की सभी नदियों, नालों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए एक “राजस्थान नदी व जल संरक्षण आयोग” के गठन की भी मांग मुख्यमंत्री से की।
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