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चारावास मुक्तिधाम में युवाओं ने किया श्रमदान : झाड़ियों एव जंगली घास से भरे परिसर की सफाई, अंतिम संस्कार में हो रही थी परेशानी


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चारावास मुक्तिधाम में युवाओं ने किया श्रमदान : झाड़ियों एव जंगली घास से भरे परिसर की सफाई, अंतिम संस्कार में हो रही थी परेशानी

चारावास मुक्तिधाम में युवाओं ने किया श्रमदान : झाड़ियों एव जंगली घास से भरे परिसर की सफाई, अंतिम संस्कार में हो रही थी परेशानी

जनमानस शेखावाटी संवाददाता : विजेन्द्र शर्मा

खेतड़ी : क्षेत्र के चारावास गांव स्थित मुक्तिधाम में गुरुवार को युवाओं ने सामूहिक श्रमदान किया। कपिल चाहर के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने मुक्तिधाम परिसर में उगी कंटीली झाड़ियों और अव्यवस्थित घास की व्यापक साफ-सफाई की। लंबे समय से देखरेख के अभाव में मुक्तिधाम में आंकड़े, गोखरू, भरुंठ, मस्करा, कुच्चै जैसी कंटीली घास फैल गई थी, जिससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले ग्रामीणों को परेशानी हो रही थी।

ग्रामीण कपिल चाहर ने बताया कि झाड़ियों के कारण दाह संस्कार के दौरान लोगों को चलने, बैठने और लकड़ी एकत्र करने में काफी दिक्कत होती थी। कंटीली झाड़ियों के अत्यधिक फैलाव से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी बाधित हो रही थी। इस समस्या के समाधान के लिए युवाओं ने श्रमदान का निर्णय लिया।श्रमदान में युवाओं ने जेली, कुल्हाड़ी, फावड़ा और दंताली जैसे औजारों का उपयोग कर झाड़ियों की कटाई की। इसके अतिरिक्त, ट्रैक्टर में गोवड़ी लगाकर पूरे मुक्तिधाम परिसर की साफ-सफाई की गई।

इस पहल से वर्षों से जमी गंदगी और अव्यवस्था दूर हुई। श्रमदान के बाद मुक्तिधाम परिसर साफ और व्यवस्थित दिखाई दिया, जिससे अब अंतिम संस्कार के लिए आने वाले ग्रामीणों को राहत मिलेगी। ग्रामीणों के अनुसार, मुक्तिधाम एक आवश्यक स्थल है, लेकिन लंबे समय से इसका नियमित रखरखाव नहीं हो पा रहा था। युवाओं की इस पहल से समस्या का समाधान हुआ और समाज में सकारात्मक संदेश भी गया। ग्रामीणों ने श्रमदान करने वाले युवाओं की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्य गांव में सामाजिक चेतना को मजबूत करते हैं।

इस श्रमदान में मंगेज कल्याण, संजय चाहर, अजय बोराण, सुरेंद्र चाहर, बलवंत मांठ, राकेश बुडानिया, दिनेश कल्याण, प्रदीप शर्मा, यतिन चाहर, बंटी खन्ना, राहुल जांगिड़, मनोज कुमार नालपुरिया सहित कई युवा उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे और ग्राम पंचायत स्तर पर मुक्तिधाम के स्थायी रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अंतिम संस्कार के समय कोई असुविधा न हो।

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