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KGMU डॉक्टर रमीज गिरफ्तार, यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोप, STF को सौंपी जांच


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KGMU डॉक्टर रमीज गिरफ्तार, यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोप, STF को सौंपी जांच

KGMU डॉक्टर रमीज गिरफ्तार, यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोप, STF को सौंपी जांच

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कार्यरत डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के आरोप हैं। पहले मेडिकल कॉलेज की कमेटी इस मामले की जांच कर रही थी, लेकिन अब जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप दी गई है।
लखनऊ का किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज अब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी बन चुका है। यह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए जाना जाता है। हाल ही में यह संस्थान तब सुर्खियों में आया जब एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने यहां कार्यरत डॉक्टर रमीजुद्दीन पर यौन शोषण और धर्मांतरण का दबाव डालने का आरोप लगाया। महिला ने 23 दिसंबर 2025 को एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें डॉक्टर रमीजुद्दीन पर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न का आरोप लगाया। साथ ही आरोप लगाया कि वह उसे इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव डाल रहे थे।
विशाखा कमेटी की जांच में दोषी
एफआईआर दर्ज होने के बाद मेडिकल यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की। इसे विशाखा कमेटी नाम दिया गया और डॉ. मोनिका को इसका चेयरपर्सन नियुक्त किया गया। जांच में पता चला कि डॉ. रमीजुद्दीन पहले से शादीशुदा थे और रेजिडेंट डॉक्टर से शादी करने के लिए इस तथ्य को छिपाया था। कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि डॉ. रमीजुद्दीन ने शिकायतकर्ता का उत्पीड़न किया और यौन उत्पीड़न अधिनियम का उल्लंघन किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें मेडिकल यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर दिया गया।
निष्कासन के बाद डॉ. रमीजुद्दीन फरार हो गए। पुलिस ने पिलीभीत और लखनऊ स्थित उनके घरों पर छापेमारी की। जब वे नहीं मिले तो उनकी संपत्ति कुर्क कर ली गई। साथ ही उनके पिता सलीमुद्दीन और मां खदीजा को गिरफ्तार किया गया। दबाव बढ़ने पर डॉ. रमीजुद्दीन ने सरेंडर करने का फैसला किया और लखनऊ पहुंचे। इस बीच पुलिस को उनकी लोकेशन की जानकारी मिली और 9 जनवरी 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। मेडिकल जांच के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
अपरणा यादव का VC कार्यालय पर हमला
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश महिला आयोग की वाइस चेयरपर्सन अपरणा यादव डॉ. रमीजुद्दीन की गिरफ्तारी को लेकर वाइस चांसलर डॉ. सोनिया नित्यानंद से मिलने पहुंचीं थी। आरोप है कि उनके साथ कई हिंदू संगठनों के लोग थे, जिन्होंने VC कार्यालय में हंगामा किया, दरवाजा तोड़ा। आरोप है कि उन्होंने विशाखा कमेटी चेयरपर्सन डॉ. मोनिका कोहली और प्रो वाइस चांसलर डॉ. अपजीत कौर को बंधक बना लिया। VC जान बचाने के लिए पीछे के दरवाजे से निकली। समूह ने घंटों प्रदर्शन किया, संपत्ति तोड़ी और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर डॉ. रमीज को बचाने का आरोप लगाया।
इस घटना के बाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और स्टाफ ने हड़ताल कर दी। कॉलेज प्रशासन ने चौक थाने में अपरणा यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी, लेकिन अभी तक एफआईआर नहीं हुई। अब कॉलेज ने संघर्ष समिति गठित की है, जिसने अपरणा यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने चेतावनी दी कि यदि एफआईआर न हुई तो इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी चिकित्सा सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। डॉक्टरों और स्टाफ ने अपरणा यादव पर VC और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। उनका प्रदर्शन जारी है।
रेजिडेंट डॉक्टर का बैकग्राउंड
महिला रेजिडेंट डॉक्टर पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं और KGMU से एमडी कर रही हैं। एमडी के दौरान उनकी डॉ. रमीजुद्दीन से मुलाकात हुई। कॉलेज में हॉस्टल है और दोनों को आवास आवंटित था, लेकिन जांच कमेटी के अनुसार दोनों किराए के कमरे पर बाहर रहते थे। डॉ. मोनिका की अध्यक्षता वाली विशाखा कमेटी ने पाया कि जुलाई 2025 से दोनों के संबंध थे और शादी का इरादा था। सितंबर 2025 में रेजिडेंट डॉक्टर को पता चला कि डॉ. रमीजुद्दीन शादीशुदा हैं। फिर भी संबंध जारी रहे और दिसंबर 2025 तक चले। जब विवाद बढ़े और रेजिडेंट डॉक्टर ने एफआईआर दर्ज की, जिसमें यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न और धर्मांतरण का दबाव बताया। उन्होंने UP सरकार और महिला आयोग को भी शिकायत की। इसके बाद मामला तेजी से बढ़ा, VC ने जांच कराई, डॉ. रमीज को दोषी पाया गया, निष्कासित किया गया, फरार हुए और बाद में गिरफ्तार होकर जेल पहुंचे।
मामले में बड़े सवाल
इस केस में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं:
– सितंबर 2025 में शादी का पता चलने पर भी रेजिडेंट डॉक्टर ने संबंध क्यों नहीं तोड़े?
– दिसंबर 2025 तक एफआईआर से ठीक पहले तक कनेक्शन क्यों बनाए रखा?
– हॉस्टल छोड़कर बाहर क्यों रही?
– क्या कोई सौदा या बातचीत चल रही थी?
– सितंबर से दिसंबर तक चुप्पी क्यों?
– क्या बातचीत विफल होने पर ही एफआईआर हुई?
ये सवाल मामले को रहस्यमयी बनाते हैं। शिकायतकर्ता रेजिडेंट डॉक्टर से इन बिंदुओं पर पूछताछ होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए।
डॉ. रमीजुद्दीन मुस्लिम समुदाय से होने के कारण योगी सरकार ने अब जांच STF को सौंप दी है। उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण से जुड़े सभी मामले STF ही जांचती है। अब STF को इस केस में सितंबर से दिसंबर 2025 तक रेजिडेंट डॉक्टर की चुप्पी पर सवाल उठाने चाहिए ताकि मामले की सच्चाई उजागर हो।

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