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चिड़ासन की जगह श्रीअमरपुरा को पंचायत बनाने का विरोध:ग्रामीणों ने की सभा, बोले-दोनों की दूरी 4.5 किलोमीटर, आने-जाने के साधन भी नहीं


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चिड़ासन की जगह श्रीअमरपुरा को पंचायत बनाने का विरोध:ग्रामीणों ने की सभा, बोले-दोनों की दूरी 4.5 किलोमीटर, आने-जाने के साधन भी नहीं

चिड़ासन की जगह श्रीअमरपुरा को पंचायत बनाने का विरोध:ग्रामीणों ने की सभा, बोले-दोनों की दूरी 4.5 किलोमीटर, आने-जाने के साधन भी नहीं

चिड़ावा : चिड़ासन गांव की जगह श्रीअमरपुरा को ग्राम पंचायत बनाए जाने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले चिड़ासन को पंचायत बनाने का निर्णय हुआ था, लेकिन अब इसे बदलकर श्रीअमरपुरा को ग्राम पंचायत घोषित कर दिया गया है, जो उनके साथ अन्याय है।

विधायक और कलेक्टर को ज्ञापन सौंप चुके

इस फैसले के विरोध में रविवार को चिड़ासन गांव के लोगों ने श्री बालाजी मंदिर परिसर में एक विरोध सभा का आयोजन किया। ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। ग्रामीणों ने बताया कि चिड़ासन गांव से श्रीअमरपुरा की दूरी 4.5 किलोमीटर है और वहां तक पहुंचने के लिए पर्याप्त यातायात के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं। इस संबंध में ग्रामीण पहले भी क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र भांबू से मिलकर आपत्ति जता चुके हैं और जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंप चुके हैं।

विरोध सभा का नेतृत्व विनोद महला और पवन कुमार पायल ने किया। उन्होंने बताया कि चिड़ासन तीनों गांवों में सबसे बड़ा है। चिड़ासन की आबादी 1525 है, जबकि श्रीअमरपुरा की 911 और लोदीपुरा की 710 है। कुल आबादी 3146 होने के बावजूद चिड़ासन को ग्राम पंचायत नहीं बनाना अन्यायपूर्ण है।

चिड़ासन राजनीतिक द्वेष का शिकार-ग्रामीण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चिड़ासन गांव हमेशा से राजनीतिक द्वेष का शिकार रहा है। 1957 में इसे भुकाना में शामिल किया गया था, फिर चनाना में धकेल दिया गया। इस बार ग्राम पंचायत बनने की उम्मीद थी, लेकिन इसे श्रीअमरपुरा में जोड़ दिया गया। उनका कहना है कि श्रीअमरपुरा ग्राम पंचायत की पात्रता पूरी नहीं करता और वहां सरकारी भूमि भी उपलब्ध नहीं है, फिर भी उसे मुख्यालय बनाना चिड़ासन के साथ सौतेला व्यवहार है।

इस अवसर पर होशियार पायल, राकेश कुमार, छोतुराम, महेंद्र, सत्यवीर, प्रदीप, रोहितश, धर्मेंद्र, अनिल, सुरेश, सुनील, राजू, जगदीश और अशोक सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।

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