सीकर के 2,149 किसानों को मिले मृदा स्वास्थ्य कार्ड, 18,137 किसानों तक पहुंची योजनाओं की जानकारी
‘विकसित भारत जन सेवा अभियान’ के तहत कृषि विभाग की पहल, मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए किसानों को किया जागरूक
सीकर : ‘विकसित भारत जन सेवा अभियान’ के तहत कृषि विभाग की ओर से सीकर जिले में 2,149 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। वहीं, 18,137 किसानों को विभागीय योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी देकर लाभान्वित किया गया।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद सीकर शिवजी राम कटारिया ने बताया कि अभियान के तहत किसानों तक कृषि योजनाओं और तकनीकी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, प्रदेश में अब तक 59,712 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं और 4 लाख 64 हजार किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई है।
झुंझुनूं में 2,522 कार्ड वितरित
मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण के तहत सवाई माधोपुर में 6,685, करौली में 5,117, नागौर में 3,532, डीडवाना-कुचामन में 2,718 और झुंझुनूं में 2,522 कार्ड वितरित किए गए। वहीं, विभागीय योजनाओं की जानकारी से लाभान्वित किसानों में सवाई माधोपुर के 40,473, जयपुर के 32,340, जोधपुर के 26,370, भीलवाड़ा के 20,304, सिरोही के 18,371 और सीकर के 18,137 किसान शामिल हैं।
ग्रामीण शिविरों के जरिए किसानों तक पहुंचीं योजनाएं
अभियान के तहत 19 से 25 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर सेवा सेतु अभियान ग्रामीण क्षेत्र तथा 26 से 28 सितंबर तक गिरदावर सर्किल स्तर पर ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने के साथ कृषि विभाग की योजनाओं, सुविधाओं और तकनीकी सेवाओं की जानकारी दी गई। अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है।
मिट्टी की जांच से उर्वरक खर्च घटाने में मिलेगी मदद
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को अपने खेत की मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती है। मिट्टी के नमूने की वैज्ञानिक जांच के आधार पर फसल के लिए जरूरी पोषक तत्वों और उर्वरकों के उपयोग की सिफारिश की जाती है।
कार्ड में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन, पीएच, विद्युत चालकता और जैविक कार्बन सहित 12 मानकों की जांच की जाती है। इसके आधार पर उर्वरकों, जैव उर्वरकों, जैविक खाद और मृदा सुधारकों के उपयोग की सलाह दी जाती है।
इससे किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने, अनावश्यक खर्च कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
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