मस्जिदों पर बुलडोजर और UCC के मुद्दे पर मुस्लिम डेलिगेशन की विपक्षी नेताओं से उच्चस्तरीय बैठक
मस्जिदों पर बुलडोजर और UCC के मुद्दे पर मुस्लिम डेलिगेशन की विपक्षी नेताओं से उच्चस्तरीय बैठक
जमाअत ए इस्लामी हिंद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा कि राजस्थान मंत्रिमंडल द्वारा 13 अगस्त को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंज़ूरी दिए जाने और 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे पेश किए जाने के निर्णय का हम कड़ा विरोध करते है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय UCC को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा। यदि संबंधित समुदायों की धार्मिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को समाप्त कर उन पर एक समान क़ानून थोपा जाता है, तो यह लोकतांत्रिक सहमति का परिणाम नहीं, बल्कि थोपा हुआ क़ानून होगा।
उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर संबंधित समुदायों को विश्वास में नहीं लिया गया। न तो प्रस्तावित विधेयक का पूरा प्रारूप जनता के सामने रखा गया और न ही उस पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस कराई गई। केवल एक ऑनलाइन प्रश्नावली जारी कर लोगों से मुख्यतः हाँ या ना में उत्तर लेना वास्तविक जन-परामर्श का विकल्प नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय समिति की ओर से ज़िला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जन-सुनवाई भी पर्याप्त और निष्पक्ष नहीं थी। उनके अनुसार, बैठक में अधिकांशत ऐसे लोगों को ही बुलाया गया था जो UCC के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते थे, जिससे प्रभावित समुदायों की वास्तविक चिंताओं और आपत्तियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि समानता का अर्थ अनिवार्य एकरूपता नहीं है। भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक विविधता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है। इसलिए सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक व्यक्तिगत क़ानूनों को समाप्त करना संवैधानिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने सरकार से माँग की कि राजस्थान में UCC लागू करने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और प्रस्तावित विधेयक को विधानसभा में आगे न बढ़ाया जाए।
राजस्थान में समान नागरिक संहिता लागू करना न तो संवैधानिक रूप से अनिवार्य है और न ही वर्तमान परिस्थितियों में वांछनीय। व्यक्तिगत विधियों (पर्सनल लॉ) को समाप्त कर एकरूपता थोपने का प्रयास संविधान की मूल भावना तथा धार्मिक स्वतंत्रता के प्रतिकूल है और इससे समाज के विभिन्न वर्गों में असुरक्षा एवं अविश्वास की भावना उत्पन्न हो सकती है। अगर ये बिल राजस्थान में लागू किया जाता है तो इसका लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीक़े से पुरजोर विरोध किया जाएगा।

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