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समाजसेवी इंजीनियर सुरेश शर्मा : उम्र 75 की, मगर जज्बा आज भी जवान


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समाजसेवी इंजीनियर सुरेश शर्मा : उम्र 75 की, मगर जज्बा आज भी जवान

मुस्लिम युवाओं ने सादगी से मनाया जन्मदिन, वर्षों पुरानी दोस्ती और सामाजिक सरोकारों की मिसाल

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : जिला मुख्यालय पर राजकीय लोहिया महाविद्यालय के पीछे मुस्लिम बाहुल्य मोहल्ले में रहने वाले इंजीनियर सुरेश शर्मा का 75वां जन्मदिन मुस्लिम युवाओं ने सादगी के साथ मनाया। हर वर्ष की तरह इस बार भी युवाओं ने सुरेश शर्मा के जन्मदिन पर उनका अभिनंदन कर आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की।

कुछ लोग उम्र के साथ बूढ़े होते हैं, जबकि कुछ लोग अपने जज्बे और सक्रियता से उम्र को पीछे छोड़ देते हैं। इंजीनियर सुरेश शर्मा भी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। 10 अगस्त 2026 को जीवन के 75 वर्ष पूरे करने के बाद भी उनकी सक्रियता, मिलनसारिता और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी युवाओं जैसी ऊर्जा का एहसास कराती है।

सुरेश शर्मा राजस्थान इंजीनियर्स एसोसिएशन, राजस्थान, जयपुर के अध्यक्ष, पीपुल यूनिटी संस्था चूरू के सचिव, चूरू जिला अप्रवासी नागरिक परिषद के महामंत्री तथा नियम विरुद्ध कॉम्प्लेक्स निर्माण समिति के संयोजक सहित विभिन्न सामाजिक दायित्वों से जुड़े रहे हैं। उनका जीवन केवल पदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघर्ष, सामाजिक सरोकार और रिश्तों को निभाने की मिसाल भी रहा है।

हक की लड़ाई के लिए जयपुर में किया आमरण अनशन

पूर्व कनिष्ठ अभियंता सुरेश शर्मा ने वर्ष 2002 से 2005 तक कनिष्ठ अभियंता से सहायक अभियंता पद पर पदोन्नति के लिए लंबी जद्दोजहद की। अपने हक की मांग को लेकर उन्होंने जयपुर में आमरण अनशन भी किया। आखिरकार 13 दिसंबर 2005 को तत्कालीन शहरी विकास मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी, जनअभाव अभियोग समिति के तत्कालीन अध्यक्ष सत्यनारायण गुप्ता तथा पूर्व मंत्री एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।

यह संघर्ष बताता है कि सुरेश शर्मा के लिए अपने अधिकारों की आवाज उठाना केवल शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके लिए संघर्ष करने का साहस भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रहा।

छठी कक्षा के दोस्तों से आज भी कायम है रिश्ता

सुरेश शर्मा की शख्सियत का एक खास पहलू उनकी दोस्ती निभाने की कला है। बचपन से उनके साथ रहे छठी कक्षा के कई दोस्त आज भी उनके संपर्क में हैं। 75 वर्ष की उम्र में भी वे पुराने दोस्तों से मिलने उनके घर जाते हैं और वर्षों पुराने रिश्तों को उसी आत्मीयता से निभाते हैं।

उनके पड़ोस में रहने वाले लोगों के साथ भी उनका आत्मीय रिश्ता है। शहर में आज भी कई लोग उन्हें उनके पुराने परिचय ‘सुरेश शर्मा जेईएन’ के नाम से जानते हैं। राह चलते मुलाकात होने पर दुआ-सलाम और कुशलक्षेम पूछना उनके सहज व्यवहार का हिस्सा है।

सामाजिक सौहार्द की मिसाल

मुस्लिम युवाओं द्वारा हर वर्ष सुरेश शर्मा का जन्मदिन मनाया जाना चूरू की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। यह आयोजन बताता है कि मजबूत रिश्ते धर्म और उम्र की सीमाओं से ऊपर होते हैं।

सुरेश शर्मा के जीवन में संघर्ष है, सामाजिक सरोकार हैं, वर्षों पुरानी दोस्ती है और सबसे बढ़कर जिंदगी को जिंदादिली से जीने का हुनर है। 75 वर्ष की उम्र में भी उनकी सक्रियता यही संदेश देती है कि उम्र महज कैलेंडर पर दर्ज एक संख्या है, असली उम्र इंसान के जज्बे में होती है।

जन्मदिन के अवसर पर युवाओं और शुभचिंतकों ने उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

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