BRO जवान जगवीर रेपसवाल को नम आंखों से अंतिम विदाई, 13 वर्षीय बेटे राहुल ने दी मुखाग्नि
6 घंटे के धरने के बाद निकली 9 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
सादुलपुर : अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले बीआरओ (Border Roads Organisation) की जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) के जवान जगवीर रेपसवाल (40) का शनिवार को उनके पैतृक गांव लंबोर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके 13 वर्षीय इकलौते पुत्र राहुल ने पिता को अंतिम सैल्यूट कर पुष्पचक्र अर्पित किया और नम आंखों से मुखाग्नि दी। इस भावुक दृश्य ने वहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
इससे पहले शहीद का दर्जा देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने शनिवार सुबह सादुलपुर शहीद स्मारक पर करीब छह घंटे तक धरना दिया। परिजनों ने मांगों पर सहमति बनने तक पार्थिव देह लेने से इनकार कर दिया। दोपहर करीब तीन बजे भाजपा नेता देवेंद्र झाझड़िया के साथ हुई वार्ता में मांगों पर मौखिक सहमति बनने के बाद धरना समाप्त हुआ और सादुलपुर से पैतृक गांव लंबोर तक करीब 9 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई।
राहत कार्य के दौरान हुआ था हादसा
जगवीर रेपसवाल 1 जनवरी 2010 को बीआरओ की जीआरईएफ में भर्ती हुए थे और वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश में तैनात थे। हाल ही में पहाड़ी क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य के दौरान उनके ऊपर चट्टान गिर गई, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। वे लगभग तीन महीने पहले ही अवकाश बिताकर पुनः ड्यूटी पर लौटे थे।
धरने के बाद बनी सहमति
धरने के दौरान सादुलपुर विधायक मनोज न्यांगली, एसडीएम मनोज खेमदा, थानाधिकारी राजेश सिहाग सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों एवं ग्रामीणों से वार्ता की। विधायक मनोज न्यांगली ने सैनिक कल्याण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से दूरभाष पर बातचीत कर ग्रामीणों की मांगों से अवगत कराया। ग्रामीणों ने मांगें नहीं माने जाने पर रास्ता जाम करने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
पिता को अंतिम सलामी देकर भावुक हुआ बेटा
अंतिम संस्कार से पहले 13 वर्षीय राहुल ने पिता की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर अंतिम सलामी दी। इसके बाद वह पिता के चरणों में झुककर फूट-फूटकर रो पड़ा। यह दृश्य देखकर अंतिम संस्कार में मौजूद लोग भी भावुक हो गए।
बड़ी संख्या में उमड़ा जनसैलाब
अंतिम संस्कार में पूर्व सांसद राम सिंह कस्वां, विधायक मनोज न्यांगली, पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया, कांग्रेस नेता संजय पूनिया, नंदलाल पूनिया, एसडीएम मनोज खेमदा, थानाधिकारी राजेश सिहाग, एडवोकेट प्रदीप कस्वां सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सैनिक, भूतपूर्व सैनिक और ग्रामीण उपस्थित रहे।
परिवार में छोड़ गए गहरा शोक
जगवीर रेपसवाल अपने पीछे पत्नी संतोष कुमारी, 13 वर्षीय पुत्र राहुल, 11 वर्षीय पुत्री, माता कमला देवी तथा छोटे भाई सुखबीर रेपसवाल को छोड़ गए हैं। उनके पिता जय सिंह रेपसवाल का वर्ष 1998 में निधन हो चुका है।
GREF जवानों को शहीद का दर्जा नहीं मिलने का मुद्दा
भूतपूर्व सैनिक संघ के पूर्व अध्यक्ष जगत सिंह ने बताया कि जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) के जवानों को सेना की अधिकांश सुविधाएं तो मिलती हैं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था के अनुसार उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। इसी मुद्दे को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने सरकार से उचित निर्णय लेने की मांग की।
देखें जवान की अंतिम यात्रा से जुड़ी PHOTOS…





सुबह 9 बजे परिजन धरने पर बैठ गए थे
जवान का शव शनिवार सुबह सादुलपुर शहीद स्मारक पहुंचा। इसके बाद परिजनों ने जवान की पार्थिव देह लेने से इनकार कर दिया। सुबह 9 बजे परिजन शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए थे। करीब 6 घंटे बाद दोपहर 3 बजे मांगों पर सहमति बनी थी।
रास्ता जाम करने की दी थी चेतावनी
इससे पहल सुबह मांगों को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठ गए और प्रदर्शन करने लगे थे। सादुलपुर विधायक मनोज न्यांगली, एसडीएम मनोज खेमदा, थानाधिकारी राजेश सिहाग समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और लोगों से समझाइश करने लगे थे।
विधायक ने मंत्री राठौड़ से की थी बात
विधायक मनोज न्यांगली ने लोगों की मांगों को लेकर सैनिक कल्याण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से बात की थी। इसके बाद विधायक ने जिला कलेक्टर से बात कर ग्रामीणों की ओर से आधे घंटे का अल्टीमेटम दिया था। ग्रामीणों ने मांगें नहीं मानने पर रास्ता जाम करने की चेतावनी दी थी। हालांकि मांगों पर सहमति बनने के बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया।
ग्रीफ के सैनिकों को नहीं मिलता शहीद का दर्जा
भूतपूर्व सैनिक संघ के पूर्व अध्यक्ष जगत सिंह ने बताया – जगवीर BRO की जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में तैनात थे। ग्रीफ के सैनिकों को फौज की बाकी सुविधाएं तो मिलती हैं, लेकिन शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता।
धरना-प्रदर्शन से जुड़ी अन्य तस्वीरें…




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