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एक हाथ के “हुनर के हीरो” जावेद का सड़क दुर्घटना में निधन


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एक हाथ के “हुनर के हीरो” जावेद का सड़क दुर्घटना में निधन

झुंझुनूं की श्रीगोपाल गोशाला में उनके हाथों से बनाया गोवर्धन पर्वत आज भी उनकी जीवंत कलाकारी की गवाही दे रहा है।

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद आरिफ चंदेल

इस्लामपुर : गुढ़ागौड़जी में मंगलवार देर रात को होटल से खाना खाकर लौट रहे स्कूटी सवार दो युवकों को एक स्विफ्ट कार ने टक्कर मार दी। टक्कर लगने पर स्कूटी पर सवार दोनों युवक उछलकर सड़क पर गिर पड़े। सड़क दुर्घटना में संत कुमार सैनी निवासी किशोरपुरा और इस्लामपुर निवासी जावेद की मौके पर ही मौत हो गई। इस्लामपुर निवासी मृतक जावेद(50) चार भाइयों में तीसरे नंबर का और शादीशुदा था। जावेद के तीन लड़कियां और दो लड़के हैं।

कला के हुनर का हीरो था एक हाथ का मृतक जावेद

मृतक जावेद कला के हुनर का हीरो था। चित्रकारी और कलाकारी उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली थी। जावेद जब 27 वर्ष के थे तो छत से गिरने पर उन्होंने अपना एक हाथ खो दिया था। उनके हौसले के आगे एक हाथ की कमी उन्हें कभी नहीं अखरी। जावेद शिल्प कला के जादूगर थे। उन्होंने अपनी इस कला का लोहा देशभर में मनवाया था। जावेद देशभर में लगभग 400 से ज्यादा मंदिरों, मस्जिदों, गोशालाओं और धर्मशालाओं में अपनी कलाकारी का जादू बिखेर चुके हैं। इस एक हाथ के कला के जादूगर ने राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, आकोला, मुंबई व नागपुर सहित देशभर में अपनी चित्रकारी व कलाकारी की अमिट छाप छोड़ी है। झुंझुनूं की श्रीगोपाल गोशाला में उनके हाथों से बनाया गोवर्धन पर्वत आज भी उनकी जीवंत कलाकारी की गवाही दे रहा है।

महीने भर से गुढ़ागौड़जी में कर रहे थे कलाकारी, काम निपटाकर बुधवार को आने वाले थे घर

जावेद लगभग महीने भर से गुढ़ागौड़जी में ही रहकर वहां तामीर हो रही एक मस्जिद की मीनारों में अपनी चित्रकारी ओर कलाकारी का हुनर दिखा रहे थे। मस्जिद कमेटी के लोगों ने बताया कि वह मंगलवार देर शाम तक मस्जिद में काम कर रहे थे कुछ ही घंटे का काम शेष था कि रात हो गई। जावेद कल सुबह-सुबह काम निपटाकर घर जाने की बात कहकर होटल पर खाना खाने निकल गए। मगर नियति को कुछ ओर ही मंजूर था कि होटल से खाना खाकर आते वक्त सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। बुधवार को जावेद घर तो पहुंचा मगर हमेशा के लिए खामोश होकर। आज कलाकार जावेद इस दुनिया में नहीं रहे मगर उनके हाथों मंदिर, मस्जिदों व धर्मशालाओं में उकेरी गई शिल्प कला आने वाली पीढ़ियों को उनकी कलाकारी की गवाही देंगी।

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