मोहम्मद_अहमद_बिन_सय्यद_अब्दुल्लाह-उर्फ_मेंहदी_सूडानी
22 जून 1885 यौमें वफात
मोहम्मद अहमद बिन सय्यद अब्दुल्लाह पैदाइश 12 अगस्त 1845 मौत 22 जून 1885 सूडान की एक मारूफ हस्ती हैं जिन्हें मुल्क में तहरीक इस्लाम का बानी तस्लीम किया जाता है वह अंग्रेजों और मिस्री हुकूमत की अवामी दुश्मन पालिसी के खिलाफ और शरीयत इस्लामी हुक़ूक़ के नफ़ाज़ की वजह से दुनिया में मशहूर हुए।
मिस्री हुक्माराम मोहम्मद अली पाशा ने 1820 में नोबिया और अगले साल सुनार फतेह कर लिया और सूडान पर मिस्री हकूमत का अधिकार आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता गया यहां तक कि 1870 में अस्तवाईया यानी मौजूदा सूडान का इंतिहाई जुनूबी हिस्सा भी मिस्री सल्तनत में शामिल हो गया।
मिस्र की हुकूमत ने सूडानी बाशिंदों के साथ अच्छा सलूक नहीं किया जिसका सूडानियों में शदीद रद्दे अमल हुआ और 1883 में उन्होंने एक दरवेश सिफत इंसान मोहम्मद अहमद की रहनुमाई में इल्म बुलंद किया बगावत के लिए यही मोहम्मद अहमद मेहंदी सूडानी कहलाते थे मेहंदी सूडानी के पैरोकारों दरवेशों ने 2 साल के अंदर-अंदर तकरीबन पूरे सूडान पर कब्जा कर लिया यह वह जमाना था कि मिस्र पर अंग्रेजों का कब्जा कायम हो चुका था जिसकी वजह से मिस्र की हुकूमत ने सूडानी बगावत को कुचलने के लिए एक अंग्रेज फौजी जनरल गोर्डन की खिदमत हासिल की लेकिन जनरल गोर्डन को उस मकसद में कामयाबी हासिल नहीं हुई और वह मारा गया इसी तरह 26 जनवरी 1885 को खरतूम पर दरवेशों का कब्जा हो गया मेहंदी सूडानी अब मिस्र पर हमले की तैयारी कर रहे थे कि उनका इंतकाल हो गया।

मेहंदी सूडानी तारीखे इस्लाम की बुलंद हस्ती हैं वह सिर्फ एक सियासी रहनुमा और एक हुकूमत के बानी ही नहीं थी बल्कि एक मसलह भी थे उन्होंने जामे अजहर में तालीम पाई और कहा जाता है कि वही उनकी मुलाकात जमालुद्दीन अफगानी से हुई हुई मिस्र से वापस आने के बाद उन्होंने तसूफ की मंजिलें तय की वह तमाम जिंदगी अहकाम ए इस्लाम की सख्ती से पाबंदी करते रहे 1880 में अपने शेख की वफात के बाद मेहंदी सिलसिला समानिया के सरबराह हो गए उन्होंने कई साल दरिया ए नील के एक जज़ीरे पर आबा में रिहाईश अख्तियार की और यहीं से अपनी तहरीक चलाई यह तहरीक 29 जून 1881 में उस वक्त शुरू हुई जब मेहंदी ने सूडान के मुमताज लोगों को किताबों सुन्नत की बाला दस्ती कायम करने की दावत दी उन्होंने इस पर जोर दिया कि इस मकसद के लिए लोगों को जानो माल की कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए और तमाम पीरो जजीरा आबा हिजरत करके आ जाएं बस इसी के बाद सूडान के मिस्री हुक्काम और मेहंदी के हामियों में झड़पें शुरु हो गई जो आगे चलकर मेहंदी की फतेह पर खत्म हुई, मेहंदी ने कामयाबी हासिल करके दरिया ए नील के मग़रिबी किनारे पर ख़रतूम के बिल मुकाबिल उम्में दरमान के शहर को अपना दारुल हुकूमत बनाया हुकूमत संभालते ही उन्होंने इस्लाहात नाफ़िज़ करना शुरू कर दिया नए सिक्के ढाले गए और जिन लोगों को साबिक हुकूमत ने नाजायज तौर पर उनकी जमीनों से बेदखल कर दिया था उन्हें उनकी जमीन वापस कर दी गई मेहंदी सूडानी ने इस्लामी तालीमात को आम किया इस्लामी तालीमात के खिलाफ फैलने वाली रस्म को खत्म करने की कोशिश की और शराब और नशा की सारी चीजें बंद करवाई और इस पर इस्तेमाल पर बैन लगाया औरतों को पर्दे की हिदायत की गई शादी विवाह पर फिजूलखर्ची से रोका गया और दहेज पर मुकम्मल पाबंदी आयद की गई, अंग्रेजों ने मेहंदी सूडानी और उनके पैरोकारों को बदनाम करने की बड़ी कोशिश की हत्ता की 1900ई में जब सूडान पर अंग्रेजी और मिस्री कब्जा मुकम्मल होने के बाद अंग्रेज सरदार लाड कचज ने इंतकाम के चक्कर में अंधे होकर इंसानियत सोज काम किया मेहंदी की कब्र खुदवाई और उसकी हड्डियां जला डाली, मेहंदी सुडानी को सूडान की तहरीर बेदारी का पेशरो माना जाता है और उम्में दरमान में आप का मजार आज भी सूडानी मुसलमानों की जाए अकीदत है
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