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सिंघानिया विश्वविद्यालय में वैश्विक शिक्षा पर संवाद, न्यूकैसल यूनिवर्सिटी व कॉर्पोरेट विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव


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सिंघानिया विश्वविद्यालय में वैश्विक शिक्षा पर संवाद, न्यूकैसल यूनिवर्सिटी व कॉर्पोरेट विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

सिंघानिया विश्वविद्यालय में वैश्विक शिक्षा पर संवाद, न्यूकैसल यूनिवर्सिटी व कॉर्पोरेट विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अयूब खान 

पचेरी बड़ी : सिंघानिया विश्वविद्यालय परिसर में “शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण : अवसर, चुनौतियां एवं वैश्विक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक भूमिका” विषय पर विशेष व्याख्यान एवं संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में न्यूकैसल यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल, यूके के शिक्षाविद् डॉ. मयंक सेवक और अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट विशेषज्ञ वरिन्द्र सेवक ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ वैश्विक शिक्षा और करियर संभावनाओं पर चर्चा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, पौधारोपण, अतिथियों के तिलक एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंट डॉ. मनोज कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को वैश्विक बदलावों और नए अवसरों से जोड़ने के लिए समय-समय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आधुनिक सुविधाओं और स्किल आधारित कार्यक्रमों पर कार्य कर रहा है।

ग्रामीण परिवेश से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर बताया
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बीएलएस इंटरनेशनल के निदेशक (कॉर्पोरेट अफेयर्स एवं स्पोर्ट्स) वरिन्द्र सेवक ने अपने जीवन और व्यावसायिक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा ग्रामीण परिवेश से शुरू हुई और मेहनत, सीखने की इच्छा तथा निरंतर प्रयासों से उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बदलते समय में सफलता के लिए नई तकनीकों, कार्यप्रणाली और कौशल को अपनाना जरूरी है। उन्होंने टीमवर्क, बेहतर संबंध निर्माण और लगातार सीखते रहने को सफलता का आधार बताया।

विदेशी शिक्षा और रोजगार अवसरों की दी जानकारी
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल, यूके के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मयंक सेवक ने शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय विद्यार्थियों के लिए विदेशों में उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने विदेशों में पढ़ाई की संभावनाओं, शैक्षणिक खर्च, वीजा नियमों और वैश्विक रोजगार बाजार की चुनौतियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा, विश्लेषणात्मक सोच, रिसर्च और व्यावहारिक ज्ञान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत भी वैश्विक शिक्षा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।

विद्यार्थियों को संस्कार और नैतिक मूल्यों का संदेश
गेस्ट ऑफ ऑनर प्रोफेसर लाज कौशल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार, कार्य के प्रति निष्ठा और नैतिक मूल्य भी जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहम्मद इमरान हाशमी ने किया। इस अवसर पर लकी रोहिल्ला (पूर्व आईआईटियन एवं क्वांटेल संस्थापक), जेट्री ग्रुप से दीपक गर्ग, प्रो प्रेसिडेंट एवं चीफ फाइनेंस ऑफिसर सुनील कुमार सोबती सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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