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31 साल से लापता फौजी का इंतजार, न्याय की आस में दर-दर भटक रही पत्नी; परिवार ने बेची 15 बीघा जमीन


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31 साल से लापता फौजी का इंतजार, न्याय की आस में दर-दर भटक रही पत्नी; परिवार ने बेची 15 बीघा जमीन

1995 में छुट्टी से लौटने के बाद लापता हुए सैनिक नौरंग सिंह शेखावत, पत्नी ने मजदूरी कर पाला परिवार; आज भी सच्चाई और न्याय का इंतजार

बुहाना : एक फौजी की पत्नी पिछले 31 वर्षों से अपने पति की तलाश और न्याय की उम्मीद में संघर्ष कर रही है। बुहाना क्षेत्र के बलौदा गांव निवासी संतोष कंवर का जीवन पति की गुमशुदगी के बाद संघर्षों की लंबी कहानी बन गया। आर्थिक तंगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच उन्होंने बच्चों का पालन-पोषण किया, लेकिन आज भी उन्हें अपने पति नौरंग सिंह शेखावत के बारे में स्पष्ट जानकारी और न्याय का इंतजार है।

परिवार के अनुसार नौरंग सिंह शेखावत वर्ष 1979 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। जून 1995 में छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर लौटने के बाद वे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। कुछ समय बाद सेना की ओर से परिवार को सूचना दी गई कि वे मिल गए हैं, लेकिन परिजनों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में वर्ष 2002 में उनकी अनुपस्थिति के आधार पर सेना से बर्खास्त किए जाने की जानकारी दी गई।

पति के लापता होने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी संतोष कंवर पर आ गई। उन्होंने मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण किया और विपरीत परिस्थितियों में परिवार को संभाला। आर्थिक हालात इतने खराब हो गए कि बच्चों की पढ़ाई और शादी-विवाह की जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए परिवार को करीब 15 बीघा पैतृक जमीन बेचनी पड़ी।

संतोष कंवर का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक विभिन्न सरकारी कार्यालयों, सैनिक कल्याण विभाग और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला। उनके बेटे अजीत सिंह भी लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।

परिवार ने रक्षा मंत्रालय और उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने तथा आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि तीन दशक बीत जाने के बावजूद उन्हें आज भी उम्मीद है कि एक दिन सच सामने आएगा और परिवार को न्याय मिलेगा।

यह मामला न केवल एक सैनिक परिवार के संघर्ष की कहानी है, बल्कि उन सवालों को भी सामने लाता है जिनके जवाब पाने के लिए एक परिवार तीन दशक से इंतजार कर रहा है।

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