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भागवत कथा में गूंजी महारास लीला, रात्रि को ‘श्री हरि कृपा संकीर्तन’ में जमकर झूमे श्रद्धालु


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भागवत कथा में गूंजी महारास लीला, रात्रि को ‘श्री हरि कृपा संकीर्तन’ में जमकर झूमे श्रद्धालु

भागवत कथा में गूंजी महारास लीला, रात्रि को 'श्री हरि कृपा संकीर्तन' में जमकर झूमे श्रद्धालु

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : स्थानीय स्टेशन रोड स्थित श्रीराम मंदिर के पावन प्रांगण में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन आज पूरा क्षेत्र श्री कृष्ण भक्ति के अलौकिक रंग में सराबोर हो गया। अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के इस पावन अवसर पर उमड़े अपार जनसैलाब और श्रद्धालुओं के बहते अश्रुओं ने माहौल को पूरी तरह दिव्य और भावुक बना दिया। छठे दिन जीवंत हुई महारास और रुक्मिणी मंगल की अलौकिक लीला कथा के छठे दिन वृंदावन से पधारे परम पूज्य कथा वाचक हरीश ठाकुर महाराज ने अपनी मधुर और ओजस्वी वाणी से भगवान श्री कृष्ण की दिव्य ‘महारास लीला’ और ‘रुक्मिणी मंगल’ (रुक्मिणी विवाह) के प्रसंग का रसास्वादन कराया।

भावुक हुए श्रद्धालु: महाराज श्री ने जब जीव और परमात्मा के मिलन की प्रतीक महारास लीला का वर्णन किया, तो पांडल में बैठे हजारों श्रद्धालुओं की आँखें छलक आईं। उमड़ा विवाह का उल्लास: रुक्मिणी विवाह के प्रसंग के दौरान जैसे ही भगवान श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी के स्वरूपों की वरमाला का उत्सव शुरू हुआ, पूरा पंडाल फूलों की वर्षा और “जय श्री कृष्णा” के जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं और युवतियों ने झूमते-गाते हुए भगवान की आरती उतारी और दिव्य स्वरूपों के सामने नृत्य कर अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट की।

रात्रि को फूल मालाओं से सजा ‘श्री हरि कृपा संकीर्तन’ का भव्य दरबार, भजनों पर झूम उठी धर्मनगरी भागवत कथा के उपरांत इसी पांडल में रात्रि 8 बजे से ‘श्री हरि कृपा संकीर्तन’ का एक बेहद भव्य और आलौकिक आयोजन किया गया। देर रात “हरि इच्छा तक” चले इस संकीर्तन में ख्यातिप्राप्त भजन गायकों ने अपनी सुरमई प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

सुरमई प्रस्तुतियां: कानपुर से पधारे सुप्रसिद्ध गायक कलाकार मन्नत शर्मा एवं राम त्रिपाठी तथा चूरू के स्थानीय लाडले कलाकारों मेहुल शर्मा, अनुज गोयल और राकेश दाधीच ने एक से बढ़कर एक भावपूर्ण और मनमोहक भजनों की गंगा बहाई। आयोजन समिति ‘स्वयं परम प्रभु श्री हरि’ और समस्त हरि प्रेमियों ने बताया कि इस दिव्य महोत्सव का कल यानी 9 जून(मंगलवार) को सुबह 9:15 बजे से अंतिम दिन होगा। कल की कथा में मित्रता की मिसाल ‘सुदामा चरित्र’ का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा, जिसके बाद शुकदेव जी की विदाई, महाआरती और विशाल भंडारा प्रसादी का आयोजन होगा।

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