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अनीस-काशिफा निकाह के बंधन में बंधे, सादगीपूर्ण विवाह बना मिसाल


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अनीस-काशिफा निकाह के बंधन में बंधे, सादगीपूर्ण विवाह बना मिसाल

बिना डीजे, घोड़ी और दिखावे के इस्लामिक रीति से हुआ निकाह; समाज को दिया सादगी और फिजूलखर्ची छोड़ने का संदेश

जनमानस शेखावाटी सवांददाता :  मोहम्मद अली पठान

सूरतगढ़ : आज के दौर में जहां शादियां तड़क-भड़क, दिखावे और फिजूलखर्ची का माध्यम बनती जा रही हैं, वहीं चूरू और सूरतगढ़ के पठान परिवारों ने सादगीपूर्ण निकाह कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। सूरतगढ़ निवासी अनीस पठान पुत्र नियाज मोहम्मद पठान एवं चूरू निवासी काशिफा जान पुत्री मोहम्मद रमजान पठान का निकाह अत्यंत सादे और धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।

बारात सूरतगढ़ से सादगी के साथ पहुंची, जिसमें न घोड़ी थी, न डीजे और न ही किसी प्रकार का आडंबर। बारात में शामिल गणमान्य लोगों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। निकाह की रस्म शहर काजी अहमद अली शाह एवं आरिफ अली काजी ने इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराई। खुत्बा पढ़ा गया और नवदंपती के सुखद वैवाहिक जीवन के लिए दुआएं की गईं।

निकाह के बाद आयोजित दावत-ए-आम में मेहमानों ने शिरकत कर नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं। इसके पश्चात काशिफा जान को परिवारजनों ने भावुक माहौल में विदा किया। इस अवसर पर दादा हाजी आबिद हुसैन, हाजी अख्तर अली, इलियास पठान, अकबर खान, अहमद हुसैन, अकरम पठान, असलम पठान, इस्लाम पठान, अनवर खान, आदिल खान, समीर खान, अतहर रेहान, असद पठान सहित परिजनों और रिश्तेदारों ने नवदंपती को नेक दुआओं के साथ विदा किया।

समारोह में उपस्थित लोगों ने कहा कि सादगीपूर्ण विवाह न केवल सामाजिक बुराइयों और अनावश्यक खर्चों को रोकने का माध्यम है, बल्कि नई पीढ़ी को सरल और जिम्मेदार जीवन जीने की सीख भी देता है। यह निकाह समाज में सादगी, भाईचारे और सकारात्मक सोच का संदेश देने वाला साबित हुआ।

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