इस्लामपुर का नाम बदलकर ‘श्रीरामपुर’ करने की मांग पर बवाल, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
भाजपा विधायक की सिफारिश पर CMO ने मांगी रिपोर्ट, ग्रामीण बोले- नाम बदलने से मिटेगी ऐतिहासिक पहचान और बढ़ेंगी प्रशासनिक परेशानियां
इस्लामपुर : जिले के ऐतिहासिक गांव इस्लामपुर का नाम बदलकर “श्रीरामपुर” करने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर झुंझुनूं के भाजपा विधायक राजेंद्र भाम्बू ने मुख्यमंत्री कार्यालय को नाम परिवर्तन की सिफारिश की है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
दरअसल, झुंझुनूं से भाजपा विधायक राजेंद्र भाम्बू ने 17 फरवरी 2026 को CMO को एक पत्र लिखकर ‘इस्लामपुर’ का नाम परिवर्तित करके ‘श्रीरामपुर’ करने की मांग सिफारिश की थी। स्थानीय लोग नाम नहीं बदलने को लेकर विराेध कर रहे है। लोगों का कहना है कि नाम बदलने के बाद जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
विधायक की सिफारिश प्रक्रिया शुरू
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा 29 मई को जिला कलेक्टर झुंझुनूं को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया गया है। इस पत्र में झुंझुनूं से भाजपा विधायक राजेंद्र भाम्बू द्वारा 17 फरवरी को लिखे गए एक पत्र का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने ग्राम ‘इस्लामपुर’ का नाम परिवर्तित करके ‘श्रीरामपुर’ करने की अनुशंसा की थी। CMO के उप सचिव जय प्रकाश नारायण द्वारा जारी इस पत्र में जिला कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पूरे मामले में तथ्यों की जांच कर विस्तृत टिप्पणी और तथ्यात्मक रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को भेजें।
‘इस्लामपुर’ शेखावत इतिहास का केंद्र है
झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इस्लामपुर शेखावाटी क्षेत्र की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक बसावटों में से एक है। इतिहास के जानकारों के अनुसार, यह क्षेत्र मध्यकाल में नवाबों और स्थानीय राजपूत शासकों की गतिविधियों का प्रमुख गवाह रहा है।
झुंझुनूं के कायमखानी नवाबों के दौर में इस क्षेत्र का प्रशासनिक और सामरिक महत्व काफी बढ़ गया था, जिसके बाद ही इस क्षेत्र को ‘इस्लामपुर’ के रूप में पहचान मिली। यह गांव लंबे समय से अपने ऐतिहासिक कुओं, समृद्ध विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता रहा है।

सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने की मांग
झुंझुनूं विधायक राजेन्द्र भाम्बू ने कहा- इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर ‘श्रीरामपुर’ करने की मांग लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्र की जनता द्वारा की जा रही थी। जनता अपनी सांस्कृतिक और प्राचीन पहचान को पुनर्जीवित करना चाहती है। जनभावनाओं का आदर करते हुए ही मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। यह प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक है।
पहचान खोने का डर
वहीं दूसरी ओर, इस प्रशासनिक प्रस्ताव के विरोध में ग्राम पंचायत इस्लामपुर के प्रशासक और पूर्व सरपंच आमीन मणियार के नेतृत्व में सर्वसमाज के लोगों ने जिला कलेक्टर अरुण गर्ग को एक औपचारिक आपत्ति-पत्र सौंपा है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस्लामपुर नाम सालों पुराना है और सरकारी रिकॉर्ड में शुरू से यही दर्ज है। बिना किसी ठोस ऐतिहासिक आधार के नाम बदलना तर्कसंगत नहीं है।
नाम बदलने पर जनता परेशान होगी
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में ग्रामीणों ने बताया- इस्लामपुर जिला झुंझुनूं का सबसे बड़ा एकल राजस्व गांव है, जिसकी आबादी लगभग 15,000 है और यहां करीब 8,500 मतदाता हैं। यदि गांव का नाम बदला जाता है, तो आम जनता को गंभीर प्रशासनिक और व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों को अपने तमाम आवश्यक दस्तावेजों को दोबारा संशोधित करवाना होगा।

गांव का नाम बदलने की कानूनी प्रक्रिया
किसी भी राजस्व ग्राम, कस्बे या शहर का नाम बदलना एक बेहद लंबी, जटिल और बहुस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया है। सबसे पहले ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पास होता है या स्थानीय जनप्रतिनिधि (विधायक/सांसद) शासन को अनुशंसा भेजते हैं। इस मांग को जिला कलेक्टर को भेजा जाता है। कलेक्टर स्थानीय एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और पुलिस प्रशासन से रिपोर्ट मांगते हैं। इसमें कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द के पहलुओं को जांचा जाता है।
जिला प्रशासन अपनी विस्तृत सर्वे रिपोर्ट राज्य के राजस्व विभाग को भेजता है। राजस्व विभाग की समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट या मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए रखा जाता है। राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाता है।
गृह मंत्रालय इस प्रस्ताव को रेलवे मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के पास भेजता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस नाम का कोई दूसरा गांव आसपास न हो और डाक और रेलवे प्रणाली में भ्रम न फैले। सभी विभागों से NOC मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी पर राज्य सरकार आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) जारी करती है, जिसके बाद ही नाम कानूनी रूप से बदलता है।
निष्पक्षता से जांच की जाएगी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला कलेक्टर अरुण गर्ग ने बताया- मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र प्राप्त हुआ है। इस विषय में उपखंड अधिकारी (SDM), स्थानीय तहसीलदार और संबंधित विभागों से तथ्यात्मक रिपोर्ट और फीडबैक मांगा जा रहा है। राजस्व रिकॉर्ड, ऐतिहासिक तथ्यों और स्थानीय शांति व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। जिला प्रशासन पूरी तरह निष्पक्षता और नियमानुसार अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही शासन को प्रेषित करेगा।
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