हरीश ठाकुर महाराज के श्रीमुख से गूंजी श्रीमद्भागवत कथा की अमृतवाणी
मंगल कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
प्रातः गढ़ परिसर स्थित गोपाल मंदिर से निकाली गई मंगल कलश यात्रा में सैकड़ों महिला श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। भगवान के जयघोष, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन के बीच यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर श्री राम मंदिर पहुंची। यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
दोपहर 2:15 बजे कथा व्यास हरीश ठाकुर जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस महाराज श्री ने भागवत महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान की साक्षात वाङ्मयी मूर्ति है, जिसके श्रवण से जीवन में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है।

उन्होंने नारद-भक्ति संवाद का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि कलियुग में भगवान की प्राप्ति का सबसे सरल एवं प्रभावी साधन भक्ति है। महाराज श्री ने सत्संग, नाम-स्मरण और भक्तिभाव की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। इसके बाद गोकर्ण उपाख्यान का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को पापों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।
कथा के माध्यम से धर्म, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्तिभाव से कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
आयोजन समिति के अनुसार कथा महोत्सव 3 जून से 8 जून तक प्रतिदिन दोपहर 2:15 बजे से सायं 6:30 बजे तक आयोजित होगा। वहीं 9 जून को प्रातः 9:15 बजे से समापन दिवस की कथा, भव्य महाआरती एवं महाप्रसादी (भंडारा) का आयोजन किया जाएगा। समिति ने सभी धर्मप्रेमी नागरिकों से कथा श्रवण एवं समापन समारोह में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।
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