[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

13 दिन की चारधाम यात्रा पूरी कर उदयपुरवाटी लौटा श्रद्धालुओं का जत्था, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
उदयपुरवाटीझुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

13 दिन की चारधाम यात्रा पूरी कर उदयपुरवाटी लौटा श्रद्धालुओं का जत्था, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

13 दिन की चारधाम यात्रा पूरी कर उदयपुरवाटी लौटा श्रद्धालुओं का जत्था, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : कैलाश बबेरवाल

उदयपुरवाटी : धार्मिक आस्था, दृढ़ संकल्प और दुर्गम रास्तों को पार करते हुए उदयपुरवाटी कस्बे का 17 श्रद्धालुओं का जत्था 13 दिवसीय चारधाम यात्रा सकुशल पूरी कर वापस लौट आया है। भगवान केदारनाथ और बद्री विशाल के जयकारों के साथ जैसे ही श्रद्धालुओं ने कस्बे में प्रवेश किया, परिजनों और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका जोरदार स्वागत किया। अपनों को सुरक्षित और प्रफुल्लित देखकर परिजनों की आंखें खुशी से छलक उठीं। जत्थे में नवीन शर्मा, ललित कुमार सोनी, रेणु सोनी, विराट सोनी, प्रणव सोनी, संदीप कुमार सोनी, रेणु सोनी, भव्य सोनी, महिमा सोनी, ओम प्रकाश शर्मा, कांता शर्मा, विकास योगी, प्रियंका योगी, रमाकांत मित्तल, ममता, अरविन्द स्वामी, सुनीता और सुधांशु स्वामी सहित कुल 17 सदस्य शामिल थे।

बारिश और दुर्गम रास्तों के बीच आस्था की परीक्षा
यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि यात्रा बेहद कठिन और रोमांचक रही। जत्थे ने 20 मई को उदयपुरवाटी से प्रस्थान किया था। सबसे पहले हरिद्वार पहुंचकर गंगा आरती का दिव्य लाभ लिया। इसके बाद 21 मई को गंगा स्नान कर बरकोट के लिए रवाना हुए।

22 मई को हनुमान चट्टी और जानकी चट्टी होते हुए यमुनोत्री धाम के लिए करीब 7 किलोमीटर की खड़ी और दुर्गम चढ़ाई शुरू की। इस दौरान पहाड़ी इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई, लेकिन मौसम की मार भी श्रद्धालुओं के हौसले को डिगा नहीं सकी। श्रद्धालुओं ने भीगते हुए मां यमुनोत्री के दर्शन किए।

उत्तरकाशी से गंगोत्री और फिर बाबा केदार का बुलावा
यमुनोत्री से रवाना होकर जत्था उत्तरकाशी के मल्ला गांव में रात्रि विश्राम के बाद 24 मई को मां गंगोत्री धाम पहुंचा, जहां मां गंगा के उद्गम स्थल के दर्शन किए। 25 मई को दिनभर का सफर तय कर जत्थे ने तिलवाड़ा में पड़ाव डाला। 26 मई को केदारनाथ के बेस कैंप सीतापुर पहुंचे। 27 मई को सुबह तड़के बाबा केदारनाथ की करीब 18 किलोमीटर लंबी और अत्यधिक कठिन चढ़ाई घोड़े पर सवार होकर शुरू की। बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद रात्रि विश्राम मंदिर के समीप स्थित धर्मशाला में किया। 28 मई को सुबह बाबा केदार के धाम से नीचे उतरना शुरू किया और शाम तक गौरीकुंड, सोनप्रयाग होते हुए वापस सीतापुर पहुंचे।

बद्रीनाथ धाम में 4 घंटे का इंतजार, देवप्रयाग और ऋषिकेश के किए दर्शन
29 मई को जत्था बद्रीनाथ के लिए रवाना हुआ। लंबा रास्ता होने के कारण रात्रि विश्राम पीपलकोटी में करना पड़ा। 30 मई को दोपहर में जत्था भू-वैकुंठ श्रीबद्रीनाथ धाम पहुंचा। इस बार चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने के कारण जत्थे को दर्शन के लिए करीब 4 घंटे तक कतार में इंतजार करना पड़ा, लेकिन भगवान बद्री विशाल की एक झलक पाते ही सारी थकान दूर हो गई। इसके बाद 31 मई को देवप्रयाग संगम पर अलकनंदा और भागीरथी के मिलन के साक्षी बने और सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर में माथा टेका। दोपहर में ऋषिकेश पहुंचकर लक्ष्मण झूला और राम झूला देखा। 1 जून को हरिद्वार में पुनः गंगा स्नान के साथ इस अलौकिक चारधाम यात्रा की पूर्णाहुति की और देर रात सभी सदस्य सकुशल अपने गृह नगर उदयपुरवाटी लौट आए।

बाबा का बुलावा आएगा तो फिर जाएंगे
यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने बताया कि यात्रा मार्ग में चढ़ाई और मौसम के कारण मुश्किलें जरूर आईं, लेकिन जैसे ही बाबा केदार के मुख्य मंदिर और बद्रीनाथ धाम के दर्शन हुए, शरीर की सारी थकान एक पल में दूर हो गई। मन में एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार हुआ है। केदारनाथ धाम में प्रशासन की दर्शन व्यवस्थाएं काफी सुचारू थीं। यदि बाबा का बुलावा फिर आया, तो हम दोबारा इस पवित्र यात्रा पर जरूर जाएंगे।

Related Articles