जोरावरनगर में दो दिवसीय बाईसा स्नेह मिलन समारोह संपन्न, 300 बाईसा-भुवासा का हुआ सम्मान
बाईसा स्नेह मिलन में महिलाओं ने निकाली शोभायात्रा, जेसीबी से पुष्पवर्षा की गई
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत
श्रीमाधोपुर : जोरावरनगर में आयोजित दो दिवसीय बाईसा स्नेह मिलन समारोह रविवार को हर्षोल्लास, पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। समारोह में गांव की बेटियों, बहुओं, बाईसाओं और भुवासाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर सामाजिक एकता और पारिवारिक रिश्तों को नई मजबूती प्रदान की।
आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव की बेटियों और बहुओं को एक मंच पर लाकर आपसी मेलजोल बढ़ाना, वर्षों पुराने रिश्तों को मजबूत करना तथा राजपूती संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था। दो दिनों तक चले इस आयोजन में सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

भव्य स्वागत और पुष्पवर्षा
समारोह के तहत जोरावरनगर प्रवेश द्वार पर सभी बाईसाओं का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सामेला लिया गया। इस दौरान जेसीबी के माध्यम से पुष्पवर्षा कर अतिथियों और महिलाओं का भव्य स्वागत किया गया। गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
निकाली गई पारंपरिक शोभायात्रा
कार्यक्रम से पूर्व महिलाओं की पारंपरिक शोभायात्रा निकाली गई, जिसने गांव के प्रमुख मार्गों का भ्रमण किया। राजस्थानी परिधानों में सजी महिलाओं ने लोकगीतों के साथ शोभायात्रा में भाग लिया। शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल पहुंचकर संपन्न हुई, जहां उपस्थित लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

परिचय सत्र में साझा किए अनुभव
समारोह के दौरान विशेष परिचय सत्र आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न परिवारों से आई महिलाओं ने अपना परिचय दिया और जीवन के अनुभव साझा किए। इस दौरान सामाजिक संबंधों, पारिवारिक मूल्यों और संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा की गई। महिलाओं ने ऐसे आयोजनों को रिश्तों को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बताया।
सत्संग और आध्यात्मिक आयोजन
शनिवार शाम विजयराम दास महाराज की बगीची में सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में धार्मिक और सामाजिक विषयों पर विचार रखे गए तथा समाज में संस्कारों और मूल्यों को बनाए रखने का संदेश दिया गया।
पारंपरिक भजन और लोक खेल बने आकर्षण
रात्रिकालीन कार्यक्रम में पारंपरिक भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं। इसके साथ ही पुराने लोक खेलों का आयोजन किया गया, जिनमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन गतिविधियों ने पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करने का कार्य किया।

300 बाईसा और भुवासा का सम्मान
समारोह के दौरान भोजराज शेखावत परिवार की ओर से लगभग 300 बाईसा और भुवासाओं का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में महिलाओं को स्मृति चिह्न भेंट कर उनके सामाजिक योगदान और पारिवारिक भूमिका का सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
सामूहिक स्नेह भोज का आयोजन
कार्यक्रम स्थल पर सामूहिक स्नेह भोज का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। भोज के दौरान सभी ने आपसी सौहार्द और भाईचारे का परिचय देते हुए सामाजिक एकता का संदेश दिया।

हर वर्ष आयोजन की उठी मांग
मुन्नी भुवासा सहित कई महिलाओं ने इस प्रकार के आयोजनों को प्रतिवर्ष आयोजित करने की आवश्यकता जताई। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रमों से दूर-दराज में रह रही बेटियां, बहुएं और परिवार एक-दूसरे से जुड़ते हैं तथा समाज में आत्मीयता बढ़ती है।
सामाजिक समरसता का दिया संदेश
आयोजन समिति ने बताया कि दो दिवसीय समारोह ने सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया। बहन-बेटियों और परिवारों के बीच हुई आत्मीय मुलाकातों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन में राजपूती संस्कृति, परंपरा और सम्मान की अनूठी झलक देखने को मिली।
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