बाल कल्याण समिति की पूर्व अध्यक्ष और पति गिरफ्तार, नियुक्ति में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद कार्रवाई
बाल कल्याण समिति की पूर्व अध्यक्ष और पति गिरफ्तार, नियुक्ति में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद कार्रवाई
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं : बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) झुंझुनूं की पूर्व अध्यक्ष अर्चना चौधरी और उनके पति दिनेश कुमार को पुलिस ने नियुक्ति से जुड़े कथित दस्तावेजी अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर होने के बाद यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार अर्चना चौधरी की नियुक्ति 6 अक्टूबर 2021 को बाल कल्याण समिति झुंझुनूं के अध्यक्ष पद पर हुई थी। इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता राजेश अग्रवाल ने उनकी पात्रता, अनुभव प्रमाण-पत्रों तथा पूर्व आपराधिक मामलों को लेकर शिकायतें दर्ज करवाई थीं। शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के बाद न्यायालय के निर्देश पर 10 जुलाई 2023 को झुंझुनूं कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस जांच के दौरान मामला एएसआई, डीएसपी और बाद में सीआईडी-सीबी जयपुर तक पहुंचा। जांच रिपोर्ट में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत आरोप तय किए गए। इसके आधार पर झुंझुनूं पुलिस ने अर्चना चौधरी और उनके पति दिनेश कुमार को गिरफ्तार किया।
अनुभव प्रमाण-पत्रों पर उठे सवाल
जांच के दौरान पुलिस ने आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए अनुभव प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया। रिपोर्ट के अनुसार कुछ प्रमाण-पत्रों के रिकॉर्ड और दावों में विसंगतियां सामने आईं। पुलिस ने अपनी प्रगति रिपोर्ट में कुछ दस्तावेजों को “वैध नहीं पाया गया” बताते हुए नियुक्ति के लिए आवश्यक अनुभव पर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक आवेदन में दर्शाए गए अनुभव और संबंधित संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने आगे की कार्रवाई की।
विधानसभा में भी उठा था मामला
यह मामला राजस्थान विधानसभा में भी उठाया गया था। भाजपा विधायक रामलाल शर्मा और राजेंद्र राठौड़ ने नियुक्ति प्रक्रिया और पात्रता को लेकर प्रश्न लगाए थे। विपक्ष ने नियुक्ति की जांच की मांग की थी।
जम्मू से प्राप्त हुआ रिकॉर्ड
पुलिस जांच के दौरान जम्मू से भी रिकॉर्ड प्राप्त किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अर्चना चौधरी के खिलाफ पूर्व में कुछ मामले दर्ज हुए थे, जो आवेदन से पहले निस्तारित हो चुके थे। जांच में यह भी सामने आया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार किसी मामले में न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि नहीं हुई थी।
कई स्तरों पर हुई जांच
मामले की जांच लगभग तीन वर्षों तक विभिन्न स्तरों पर चली। फाइल को कई बार जिला, रेंज और राज्य स्तर पर तलब किया गया। अंततः सीआईडी-सीबी जयपुर की जांच रिपोर्ट के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। मामले की आगे की जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। कानून के अनुसार आरोपितों को तब तक दोषी नहीं माना जाता जब तक अदालत द्वारा दोष सिद्ध न कर दिया जाए।
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