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दिव्यांगता सर्टिफिकेट में हेरफेर कर पाई सरकारी नौकरी:मेडिकल टेस्ट में भेजा डमी अभ्यर्थी, अस्पताल स्टाफ ने पकड़ा, मुंहमांगी रकम देने का वादा किया था


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दिव्यांगता सर्टिफिकेट में हेरफेर कर पाई सरकारी नौकरी:मेडिकल टेस्ट में भेजा डमी अभ्यर्थी, अस्पताल स्टाफ ने पकड़ा, मुंहमांगी रकम देने का वादा किया था

दिव्यांगता सर्टिफिकेट में हेरफेर कर पाई सरकारी नौकरी:मेडिकल टेस्ट में भेजा डमी अभ्यर्थी, अस्पताल स्टाफ ने पकड़ा, मुंहमांगी रकम देने का वादा किया था

जयपुर : स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले संदीप सैनी को गिरफ्तार किया है। आरोपी संदीप सैनी ने मेडिकल परीक्षण के दौरान डमी अभ्यर्थी भेजा था। वह जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) में टेक्निकल हेल्पर-III के पद पर कार्यरत था। जांच सामने आया कि संदीप सैनी ने सरकारी नौकरी पाने के लिए अपने दिव्यांगता प्रमाण पत्र में हेरफेर किया था। आरोपी ने श्रवण दोष का सर्टिफिकेट बनवाया था।

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया- 6 मार्च को एसएमएस अस्पताल (जयपुर) के ईएनटी (नाक, कान और गला) विभाग के नर्सिंग प्रभारी और विभागाध्यक्ष की ओर से एक रिपोर्ट भेजी गई थी। रिपोर्ट में बताया कि JVVNL में कार्यरत कर्मचारी संदीप सैनी की BERA और PTA जांच निर्धारित थी, लेकिन जांच के दौरान प्रस्तुत आधार और जनाधार कार्ड की जांच में संदेह हुआ।

आरोपी ने एसएमएस (SMS) अस्पताल में अपनी जगह मेडिकल टेस्ट देने के लिए एक डमी कैंडिडेट भेजा था। फाइल फोटो।
आरोपी ने एसएमएस (SMS) अस्पताल में अपनी जगह मेडिकल टेस्ट देने के लिए एक डमी कैंडिडेट भेजा था। फाइल फोटो।

6 मार्च को मेडिकल जांच कराने पहुंचा था डमी उम्मीदवार

जांच में सामने आया कि संदीप सैनी की जगह अशोक कुमार जाट डमी उम्मीदवार बनकर मेडिकल जांच कराने पहुंचा था। 6 मार्च को एसएमएस अस्पताल, जयपुर में अशोक कुमार ने संदीप सैनी की जगह रिवाइज दिव्यांगता परीक्षण (Disability Test) करवाने का प्रयास किया, ताकि मूल अभ्यर्थी को अनुचित लाभ मिल सके। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद जयपुर के एसओजी थाने में मुकदमा दर्ज कर अशोक कुमार जाट को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया था।

घटना के बाद से फरार था आरोपी

एडीजी विशाल बंसल ने बताया- इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी संदीप सैनी घटना के बाद से ही मौके से फरार हो गया था। एसओजी की टीम लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। आरोपी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। आखिरकार, सफलता हाथ लगी और पुलिस ने 18 मई, मंगलवार की रात को मूल आरोपी संदीप सैनी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि इस धोखाधड़ी के पीछे जुड़े अन्य कड़ियों का पता लगाया जा सके।

दिव्यांगता श्रेणी बदलकर विभाग को दिया धोखा

जांच में खुलासा हुआ है कि झुंझुनूं निवासी संदीप सैनी ने सरकारी नौकरी पाने के लिए अपने दिव्यांगता प्रमाण पत्र में बड़ी धोखाधड़ी की थी। आरोपी ने राजकीय बी.डी.के. अस्पताल झुंझुनूं से जारी अपने मूल शारीरिक अक्षमता सर्टिफिकेट में हेरफेर कर श्रवण दोष (Hearing Impairment) का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर लिया।

फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसने जेवीवीएनएल (JVVNL) में टेक्निकल हेल्पर के पद पर दिव्यांग कोटे से सरकारी नौकरी हासिल कर ली। विभाग को चकमा देकर वह लंबे समय से कार्यरत था, लेकिन कार्मिक विभाग के अगस्त 2025 के नए नियमों के तहत पुन: परीक्षण के आदेश ने आरोपी की पोल खोल दी।

10 हजार में सौदा और ‘मुंहमांगी’ रकम का वादा

संदीप सैनी को जब एसएमएस अस्पताल में दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश मिला, तो उसने पकड़े जाने के डर से अपने परिचित अशोक कुमार जाट के साथ मिलकर साजिश रची। संदीप ने अशोक को अपनी जगह डमी अभ्यर्थी बनकर टेस्ट देने के लिए तैयार किया, जिसके बदले उसे 10 हजार रुपए एडवांस और काम होने पर मोटी रकम देने का वादा किया गया था।

योजना के अनुसार अशोक अस्पताल पहुंचा, लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता के कारण यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। फिलहाल एसओजी इस गिरोह में शामिल अन्य संदिग्धों और विभागीय मिलीभगत की गहनता से जांच कर रही है; मुख्य आरोपी संदीप सैनी अभी पुलिस रिमांड पर है।

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