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गोवला व महरमपुर में जल संरक्षण और पर्यावरण को लेकर जागरूकता बैठक आयोजित


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गोवला व महरमपुर में जल संरक्षण और पर्यावरण को लेकर जागरूकता बैठक आयोजित

गोवला व महरमपुर में जल संरक्षण और पर्यावरण को लेकर जागरूकता बैठक आयोजित

चिड़ावा : समाज में जागरूकता का संदेश देने के उद्देश्य से रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान एवं ग्राम विकास समिति गोवला तथा महरमपुर के संयुक्त तत्वावधान में जल संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार, कम पानी वाली फसलों, बागवानी तथा जैविक खेती जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संस्थान के परियोजना प्रबंधक भूपेन्द्र पालीवाल ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि समय की आवश्यकता को समझते हुए किसान अब अधिक पानी चाहने वाली फसलों जैसे मूंगफली और कपास की खेती कम कर बागवानी एवं कम पानी वाली फसलों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने किसानों से जैविक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है और लोगों को शुद्ध एवं पौष्टिक अनाज प्राप्त होता है।

पालीवाल ने बताया कि आगामी बारिश के मौसम में संस्थान द्वारा “एक लीटर जल विधि” से सार्वजनिक स्थानों पर पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही गांवों में पुनर्भरण कूप बनाकर वर्षाजल को भूमिगत संग्रहित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

संस्थान के जल संसाधन एवं ग्रामीण विकास समन्वयक संजय शर्मा ने ग्रामीणों को वर्षाजल संग्रहण कुण्ड, पुनर्भरण कूप, स्वच्छता और जल गुणवत्ता के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्षाजल मानव जीवन के लिए अमृत समान है और इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भूजल एवं वर्षाजल के अंतर को समझाते हुए स्वच्छता बनाए रखने तथा प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को बंद करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने गांवों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु डालमिया संस्थान का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय कृषि पर्यवेक्षक राकेश महला, अजय बलवदा, अखिल कालेर, महेंद्र, दरियासिंह, कमल, अशोक, श्रीराम, प्रदीप, सुरेश झाझड़िया, बाबूलाल कुमावत, शिशराम मेघवाल, अनिता, मुन्नी, लक्ष्मी, मोनिका, हवासिंह, रामसिंह, नेतराम, बंशीधर, धर्मपाल, संतोष, राजबाला, सुमन सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

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