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लक्ष्मणगढ़ में लाखों की बैग वेंडिंग मशीनें खराब:10 में से 5 ही लगीं, कई जगहों पर टूटी; आमजन को नहीं मिला फायदा


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लक्ष्मणगढ़ में लाखों की बैग वेंडिंग मशीनें खराब:10 में से 5 ही लगीं, कई जगहों पर टूटी; आमजन को नहीं मिला फायदा

लक्ष्मणगढ़ में लाखों की बैग वेंडिंग मशीनें खराब:10 में से 5 ही लगीं, कई जगहों पर टूटी; आमजन को नहीं मिला फायदा

लक्ष्मणगढ़ : लक्ष्मणगढ़ शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए नगरपालिका की ओर से शहर में मुख्य बाजारों के साथ ही अलग अलग इलाकों में लगाई गई कपड़े के कैरी बैग वेंडिंग मशीनें काम में आने से पहले ही कबाड़ हो गई है। पालिका की ओर से शहर में कुल 10 कैरी बैग वेंडिंग मशीनें लगाने के लिए एक फर्म को ठेका दिया था लेकिन योजना शुरू होने के करीब सवा साल बाद भी 10 में से सिर्फ 5 मशीनें ही लग पाई है। वे भी रख रखाव के अभाव में कबाड़ बन चुकी है।

दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी टेंडर प्रक्रिया

बैग वेंडिंग मशीशों के लिए दिसंबर 2024 में शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया फरवरी 2025 में पूरी हुई थी। टेंडर की शर्तों के अनुसार फर्म को मशीन ईंस्टालेशन के बाद दो साल तक इसकी देख रेख करनी थी। मगर अनुबंध की शर्तों के अनुसार दो साल में से सवा साल गुजर चुका है तथा आधी मशीनें तो लगाईं ही नहीं गई।

शहर में अब तक पांच जगहों पर लगी मशीन

एक मशीन की लागत 82 हजार 500 रुपए तय की गई थी और एजेंसी को दो साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इसके बावजूद अब तक शहर में केवल 5 मशीनें ही लग पाई हैं, जबकि बाकी पांच स्थानों पर सिर्फ लोहे के बॉक्स लगाकर छोड़ दिए गए। कई जगह बॉक्स टूट चुके हैं और कुछ हादसे को न्योता देते नजर आ रहे हैं।

ईदगाह के पास 6 महीने पहले लगाए बॉक्स में भी मशीन नहीं लगी, आवारा पशुओं ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया है।
ईदगाह के पास 6 महीने पहले लगाए बॉक्स में भी मशीन नहीं लगी, आवारा पशुओं ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया है।
कबूतरिया कुआ के पास 6 महीने से लगा मशीन बॉक्स, बिना उपयोग के अब क्षतिग्रस्त हालत में खड़ा है।
कबूतरिया कुआ के पास 6 महीने से लगा मशीन बॉक्स, बिना उपयोग के अब क्षतिग्रस्त हालत में खड़ा है।
सवा साल पहले चौपड़ बाजार में लगी मशीन पिछले एक महीने से बंद और क्षतिग्रस्त हो रखी है।
सवा साल पहले चौपड़ बाजार में लगी मशीन पिछले एक महीने से बंद और क्षतिग्रस्त हो रखी है।

प्रचार नहीं होने से लोगों को नहीं मिला लाभ

नगरपालिका ने घंटाघर, चौपड़ बाजार और डाकनियों के मंदिर सहित अलग-अलग स्थानों पर मशीनें लगाई थीं, लेकिन योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। ऐसे में अधिकांश लोगों को इन मशीनों की जानकारी तक नहीं मिल सकी। वहीं दो मशीनें ऐसी जगह लगा दी गईं, जहां आमजन की नजर तक नहीं पहुंचती।

जो मशीनें लगाई गईं, उनकी हालत भी अब खराब हो चुकी है। कई मशीनें बंद पड़ी हैं तो कुछ टूटकर लटकती नजर आ रही हैं। रखरखाव की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद मशीनों की बदहाली नगरपालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।

भुगतान होने के बावजूद अधूरी पड़ी योजना

सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेंडर अवधि के दो साल में से सवा साल गुजर जाने के बाद भी पूरी 10 मशीनें क्यों नहीं लगाई गईं। मुख्य बाजार से रोजाना अधिकारी और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, फिर भी खराब मशीनें और वीरान पड़े बॉक्स किसी की नजर में नहीं आए। सूत्रों के अनुसार मशीनों का भुगतान भी करीब एक साल पहले हो चुका है। ऐसे में मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता नजर आ रहा है।

ईओ बोले-बाकी मशीनों को जल्द लगाया जाएगा

इस संबंध में जब नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी से जानकारी ली गई तो उन्होंने बातों को घुमाते हुए बताया कि शहर में कुल 10 मशीनें लगनी थीं, जिनमें से 7 मशीनें लगाई गई थीं। उनका कहना था कि दो मशीनों को असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि शेष मशीनों को उपयुक्त स्थान चिह्नित कर लगाया जाएगा।

अधिशाषी अधिकारी ने दावा किया कि कबूतरिया कुआं के पास भी मशीन लगाई गई थी, लेकिन मौके पर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने पर पता चला कि वहां आज तक कोई मशीन नहीं लगाई गई। स्थानीय लोगों के अनुसार वहां केवल एक बॉक्स रखा गया था, जो बाद में किसी स्कूल वाहन की टक्कर से टूटकर टेढ़ा हो गया।

जब अधिशाषी अधिकारी से पूछा गया कि मशीनों को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई या नहीं, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। वहीं भुगतान को लेकर पूछे गए सवाल पर उनका कहना था कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है, इसलिए उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।

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