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राजस्थान के ‘राज्य पुष्प’ रोहिड़े की बलि: रेंजर साहब बोले ‘सनसनी मत फैलाओ’, मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं… ​रेंजर साहब, क्या ‘राज्य पुष्प’ की सुरक्षा पर सवाल करना ‘सनसनी’ है? साहब की उदासीनता ने खड़े किए गंभीर सवाल!


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राजस्थान के ‘राज्य पुष्प’ रोहिड़े की बलि: रेंजर साहब बोले ‘सनसनी मत फैलाओ’, मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं… ​रेंजर साहब, क्या ‘राज्य पुष्प’ की सुरक्षा पर सवाल करना ‘सनसनी’ है? साहब की उदासीनता ने खड़े किए गंभीर सवाल!

​क्या रेंजर साहब का यह जवाब कहीं और इशारा कर रहा है? आखिर किसकी शह पर हुई हरे पेड़ों की हत्या? शुभकरण ने कहा किराए की मशीन लाकर मेने कटवाए रोहिड़े...! एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए अधिकारी

जनमानस शेखावाटी ब्यूरो चीफ : आबिद खान दाडून्दा

​रामगढ़ शेखावाटी : एक ओर जहाँ राजस्थान सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के बड़े-बड़े पोस्टर वायरल करवा रही है, तो वहीं दूसरी ओर राजस्थान के रामगढ़ शेखावाटी में मरुधरा की पहचान, राजस्थान का ‘राज्य पुष्प’ रोहिड़ा सिसक रहा है। जिस रोहिड़े को बचाने के लिए कड़े कानून हैं, उसी रोहिड़े को रामगढ़ शेखावाटी के ठेडी गांव के सुभकरण पुत्र पेमाराम राव ने किराए की मशीन मंगवाकर, लकड़हारों की मदद से आधी रात को कुल्हाड़ी और मशीनों से बिना किसी अनुमति के मौत के घाट उतार दिया।

जनमानस शेखावाटी न्यूज से बातचीत में ​शुभकरण ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसने किराए पर मशीन मंगवाकर हरे पेड़ों को कटवाया है। जनमानस शेखावाटी न्यूज के पास पहुंची यह जानकारी केवल पेड़ों के कटने की खबर नहीं, बल्कि पर्यावरण और कानून की निर्मम हत्या का साक्ष्य है। विडंबना देखिए कि जब पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए सिस्टम के दरवाजे खटखटाए, तो अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते नजर आए। जब मीडिया ने सच जानना चाहा, तो तहसीलदार ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा और क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजर) नरेंद्र सिंह राजपूत ने तो हदे ही पार कर दी। जब ब्यूरो चीफ आबिद खान दाडून्दा ने उनसे हरे पेड़ों के कटने पर सवाल किया, तो पहले तो वे यह कहकर पल्ला झाड़ गए कि मामला उनके अधीन नहीं है, यह रेवेन्यू का मामला है। बाद में इस गंभीर अपराध को उन्होंने ‘सनसनी’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

​सिस्टम की असंवेदनशीलता पर कड़वा सच:
राजस्थान सरकार की ‘एक पेड़ मां के नाम’ मुहिम के पोस्टर सड़कों पर चमक तो रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी फाइलों में ‘राज्य पुष्प’ का दर्जा रखने वाला रोहिड़ा आज रामगढ़ में खून के आंसू रो रहा है। रेंजर साहब और तहसीलदार महोदय के एसी कमरों में शायद पेड़ों के कटने की गूँज नहीं पहुँचती। यह केवल पेड़ों का कत्ल नहीं, बल्कि उस जनभावना का गला घोंटा गया है, जो रोहिड़े को अपनी संस्कृति और पहचान मानती है। सिस्टम की यह चुप्पी किसी कही और इशारा करती है, हरे पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी के पीछे के सच को ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज’ की टीम अपनी कलम की ताकत से बहुत जल्द उजागर करने का काम करेगी

​कानून क्या कहता हैं?
राजस्थान में रेवेन्यू भूमि पर हरे पेड़ों की कटाई को लेकर कानून बिल्कुल स्पष्ट है। Indian Forest Act, 1927 की धारा 41 एवं 42 के तहत राज्य सरकार को पेड़ों की कटाई, परिवहन और संरक्षण को नियंत्रित करने का अधिकार है, और बिना अनुमति लकड़ी/पेड़ काटना व परिवहन करना दंडनीय अपराध है। इसके साथ ही Rajasthan Forest Act, 1953 के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित प्रजातियों या हरित वृक्षों की अवैध कटाई पर वन विभाग सीधे कार्रवाई कर सकता है, भले ही भूमि रेवेन्यू श्रेणी में क्यों न हो। इतना ही नहीं, Environment Protection Act, 1986 के तहत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियाँ भी अपराध की श्रेणी में आती हैं। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 379 (चोरी), 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और 506 (धमकी) भी इस मामले में लागू होती हैं
स्पष्ट है कि “रेवेन्यू का मामला” कहकर वन विभाग जिम्मेदारी से बच नहीं सकता—विशेषकर तब, जब मामला राज्य के पर्यावरणीय महत्व और संरक्षित वृक्ष प्रजाति से जुड़ा हो।

​आधी रात का ‘ऑपरेशन रोहिड़ा
घटना रामगढ़ के ग्राम ‘ठेडी’ की है। पीड़िता सुमित्रा देवी पत्नी भागीरथ ने तहसीलदार और एसडीएम रामगढ़ को तहरीर दी है कि 3 मई 2026 की रात 11 बजे, जब पूरा इलाका सो रहा था, तब शुभकरण पुत्र पेमाराम, पाना देवी पत्नी शुभकरण और फूलाराम पुत्र पेमाराम ने अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता की कृषि भूमि में घुसपैठ की। आरा मशीनों की गड़गड़ाहट से सन्नाटा चीरते हुए 8 से 10 हरे-भरे रोहिड़े के पेड़ों को काट गिराया। गाड़ी नंबर RJ 10 GC 2752 और RJ 10 GB 2252 (महिंद्रा पिकअप) में इन पेड़ों को भरकर अपराधी खुलेआम ले गए। तो कुछ पेड़ मौके पर छोड़ गए जब पीड़ित परिवार ने विरोध किया, तो उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी गई।

​तहसीलदार की ‘वीआईपी’ खामोशी
इस मामले में सबसे पहला सवाल रामगढ़ तहसीलदार की भूमिका पर है। जब पीड़ित पक्ष ने घटना की जानकारी देने के लिए संपर्क साधने की कोशिश की, तो जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे अधिकारी ने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। जब इसी मामले पर ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज’ की टीम ने तहसीलदार से संपर्क साधा, तो उन्होंने मीडिया का फोन उठाना भी उचित नहीं समझा। क्या एक गरीब किसान की फरियाद सुनना अब अधिकारी की ड्यूटी में नहीं आता? या फिर ये रसूखदार पेड़ माफिया प्रशासन के कानों में ‘रसूख की गूँज’ भर चुके हैं?

​रेंजर साहब का अजीबोगरीब तर्क: मीडिया से बोले ‘सनसनी मत फैलाओ’
​हद तो तब हो गई जब हमारी टीम ने क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजर) नरेंद्र सिंह राजपूत से इस मामले पर सवाल किया। एक जिम्मेदार अधिकारी, जिसका काम ही जंगलों और पेड़ों की सुरक्षा है, उन्होंने इस मामले को यह कहकर खारिज कर दिया कि—”यह मेरे अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता, यह रेवेन्यू का मामला है।” और जब मीडिया ने इस अवैध कटाई पर सवाल दागा, तो रेंजर साहब की प्रतिक्रिया थी—”आप लोग सिर्फ सनसनी मत फैलाओ।” जनमानस शेखावाटी न्यूज एसी कमरों में बैठे उन वन अधिकारियों से पूछना चाहता है कि रेंजर साहब, क्या राजस्थान के संरक्षित राज्य पुष्प (रोहिड़ा) का अवैध रूप से काटा जाना महज ‘सनसनी’ है? यदि यह आपका अधिकार क्षेत्र नहीं है, तो क्या आप तहसीलदार से बातचीत नही कर सकते या फिर केवल वेतन लेने के लिए कुर्सी पर बैठे हैं? कानूनन जब राज्य पुष्प का नुकसान होता है, तो वन विभाग की जिम्मेदारी सबसे पहले बनती है। आपका यह गैर-जिम्मेदाराना बयान आपकी कार्यक्षमता और नियत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

​क्या अब कानून कागजों में सिमट गया है?
एक तरफ सरकार ‘हरियाली’ के बड़े-बड़े पोस्टर लगाती है, और दूसरी तरफ आँखों के सामने सरकारी संरक्षण वाले पेड़ काटे जा रहे हैं। क्या प्रशासन देख कर भी अनदेखा कर रहा है? क्या पेड़ माफियाओं के आगे सिस्टम ने घुटने टेक दिए हैं?

​जनमानस शेखावाटी न्यूज का प्रशासन को सीधा संदेश
भले ही अधिकारी एक-दूसरे पर मामले की जिम्मेदारी डालकर पेड़ के हत्यारों को बचा रहे हों, मगर ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज’ की टीम इस मामले को दबने नहीं देगी। टीम के चीफ इनवेस्टीगेटर आबिद खान दाडून्दा और ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज’ की टीम इस ‘रोहिड़ा हत्याकांड’ की तह तक पहुंचकर कार्रवाई की मांग करती रहेगी, क्योंकि हमारी टीम ने पहले भी हरे पेड़ काटने वाले बिजली विभाग पर जुर्माना करवाकर पर्यावरण को बचाने में अहम भूमिका निभाई है। यदि प्रशासन ने इन लकड़हारों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो ‘जनमानस शेखावाटी न्यूज’ इस मुद्दे को न केवल जनता की अदालत में ले जाएगा। बल्कि सरकार के सामने भी रखेगा

​इनका क्या कहना है?

​”यह मामला रेवेन्यू (तहसीलदार) के अंडर में आता है, इसमें मेरा अधिकार क्षेत्र नहीं है। आप लोग बेवजह सनसनी क्यों फैला रहे हो?”
नरेंद्र सिंह राजपूत, क्षेत्रीय वन अधिकारी (रेंजर)

​(नोट: तहसीलदार रामगढ़ को 6 -बार अलग अलग समय में कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।)

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