यह कैसा मेंटीनेंस : खेतड़ीनगर में बिजली निगम के कर्मचारियों ने कई स्थानों पर काटे पेड़
काटनी थी टहनियां, दर्जनभर हरे पेड़ों पर चलाई आरी, कीकरों को छुआ तक नहीं, ग्रामीणों में रोष
खेतड़ीनगर : एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अभियान चला रही है, वहीं खेतड़ीनगर में बिजली निगम द्वारा मेंटीनेंस के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह जीएसएस में मरम्मत कार्य के चलते सुबह 7 से 10 बजे तक बिजली सप्लाई बंद रखी गई थी। इस दौरान बिजली लाइनों को सुरक्षित रखने के लिए पेड़ों की टहनियों की छंटाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कर्मचारियों ने लापरवाही बरतते हुए टहनियां काटने के बजाय कई हरे पेड़ों को जमीन से करीब 5-6 फीट ऊपर से ही काट दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लाइनों को छू रहे विलायती बबूल को नहीं काटा गया, जबकि सड़क किनारे खड़े कीमती नीम और शीशम के पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। कॉपर बस स्टैंड से सिंघाना मार्ग, बगीची के पास, स्वामी विवेकानंद पार्क और डायरेक्टर्स बंगले के आसपास करीब एक दर्जन पेड़ों की कटाई की गई है।
ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बताते हुए नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पेड़ों को बड़ा होने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में उन्हें काट दिया गया। लोगों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और अनुमति के इस तरह पेड़ों की कटाई की गई है, जो गलत है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल टहनियों की छंटाई से भी बिजली लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती थी, लेकिन कर्मचारियों ने पूरे पेड़ ही काट दिए। इससे क्षेत्र की हरियाली को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
इस मामले पर बिजली निगम के एक्सईएन मोहनलाल स्वामी ने कहा कि तेज हवाओं और आंधी के दौरान टहनियां बिजली लाइनों में फंसने से फॉल्ट की स्थिति बनती है, इसलिए छंटाई के निर्देश दिए गए थे। यदि कहीं पेड़ों की कटाई हुई है तो मामले की जांच करवाई जाएगी।

अब इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या अधिकारियों ने पूरे पेड़ काटने के निर्देश दिए थे? अगर केवल टहनियां काटनी थीं, तो पेड़ों को ठूंठ क्यों बना दिया गया? और क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
अब बड़ा सवाल : जवाबदेही किसकी ?
बिजली निगम के कर्मचारियों ने इस कृत्य से साफ कर दिया है कि सरकारी महकमों के लिए पर्यावरण संरक्षण महज एक कागजी औपचारिकता है। टहनियों की बजाय हरे पेड़ों की कटाई ने कुछ बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं…
- क्या उच्चाधिकारियों ने जमीन से 5-6 फीट ऊपर से पेड़ काटने के आदेश दिए थे?
- अगर टहनियां काटनी थीं, तो पूरा पेड़ क्यों ठूंठ बना दिया गया ?
- क्या इन लापरवाह कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ प्रशासन कोई कार्रवाई करेगा?
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19





Total views : 2140994


