रींगस में नानीबाई रो मायरो कथा, भजनों पर झूमे श्रद्धालु:आचार्य शास्त्री बोले- सच्ची भक्ति से प्रभु की प्राप्ति संभव
रींगस में नानीबाई रो मायरो कथा, भजनों पर झूमे श्रद्धालु:आचार्य शास्त्री बोले- सच्ची भक्ति से प्रभु की प्राप्ति संभव
रींगस : रींगस के गोविंदबंसी पैराडाइज स्थल पर श्री खेड़ापति बालाजी सेवा समिति ट्रस्ट खाचरियावास द्वारा नानीबाई रो मायरो कथा और द्वादश ज्योतिर्लिंग पार्थिव पूजन का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन आचार्य चंद्र प्रकाश शास्त्री ने भक्ति में शक्ति के महत्व का वर्णन किया।
महंत मनोहरशरण दास महाराज पलसाना के सानिध्य में आचार्य शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि भक्त की भक्ति सच्ची हो, तो उसे भगवान से भी बड़ा दर्जा मिलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्रद्धा, विश्वास, भक्ति और प्रेम से प्रभु की प्राप्ति आसान हो जाती है।

आचार्य शास्त्री ने अपने प्रवचन में नरसी भगत का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि नरसी भगत भगवान श्रीकृष्ण के भरोसे संतों को लेकर अपनी बेटी के यहां भात भरने चले गए थे, जबकि उनके पास कुछ भी नहीं था। बेटी के घर पहुंचने पर नरसी भगत का उपहास किया गया और उन्हें ताने सुनने पड़े। हालांकि, भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी श्रद्धा, विश्वास, भक्ति और प्रेम सच्चा था। इसी सच्ची भक्ति के कारण भगवान श्रीकृष्ण स्वयं नरसी भगत के वश में होकर भात भरने के लिए पहुंच गए।

इससे पहले, आचार्य शास्त्री ने “घणी दूर से दौड़ रहे थारी गाडूली लार…” जैसे भजनों का गायन किया, जिन्हें सुनकर श्रोतागण भाव विभोर होकर कई बार नृत्य करने लगे। जसवंतगढ़ के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने संतों और मीरा के चरित्र पर मनमोहक जीवंत झांकियां प्रस्तुत कीं, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहीं। श्रोताओं ने इन झांकियों के साथ जमकर सेल्फियां भी लीं। शाम को कथा के समापन पर सभी श्रोताओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर भामाशाह गोरधन अग्रवाल टायरवाले, चंद्रशेखर कानूनगो, महेश गुप्ता, सतीश जांगिड़, शिक्षाविद भारत धींगड़ा, मल्लिका खत्री, पूर्व पार्षद अखिलेश भातरा, प्रदीप शर्मा, हेमराज ताखर, विजय भातरा, मुकेश बिजारणिया, कथावाचक डॉ. पवन तिवाड़ी, वैद्य पीएस राजपूत, ललित सिंह, कैलाश सैनी, मूलचंद जांगिड़, सत्यनारायण चूलेट, मुकेश निठारवाल, सनातन सोनी, अश्वनी भातरा, पोखरमल कुमावत, रघुनाथ जाट, अभिषेक भातरा, हंसराज कुमावत सहित रींगस, सरगोठ, लाखनी, बावड़ी, लांपुवा, आभावास, चौमू पुरोहितान तथा आसपास के गांवों और ढाणियों से बड़ी संख्या में श्रोतागण भी मौजूद थे।
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