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पृथ्वी दिवस पर विशेष: बदलता पर्यावरण, धरती के लिए बढ़ता संकट


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पृथ्वी दिवस पर विशेष: बदलता पर्यावरण, धरती के लिए बढ़ता संकट

प्रो. डॉ. शेर मोहम्मद, सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष, वनस्पति शास्त्र विभाग, लोहिया महाविद्यालय, चूरू

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान

चूंरू : हर वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस दिन विश्वभर में लाखों लोग स्थानीय और वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं पर विचार करते हैं।

प्रो. डॉ. शेर मोहम्मद ने कहा कि आज वैश्विक तापमान वृद्धि यानी वैश्विक ऊष्मीकरण पृथ्वी के सामने सबसे बड़ा संकट बन चुकी है, जिससे संपूर्ण जीव-जगत का भविष्य जुड़ा हुआ है। विज्ञान ने मानव जीवन को सुविधाजनक बनाया, लेकिन इसके अंधाधुंध उपयोग ने प्रकृति को गंभीर नुकसान भी पहुंचाया है। औद्योगिक विकास ने जहां मानव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वहीं पर्यावरण का संतुलन भी बिगाड़ दिया।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी को सदैव मां के रूप में देखा गया है, क्योंकि यह हमें जीवन देती है और पोषण करती है। लेकिन आज मानव अपने ही स्वार्थ के चलते पृथ्वी का दोहन कर रहा है। ओजोन परत में क्षरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग धरती को विनाश की ओर ले जा रहे हैं।

इतिहास की बात करें तो पहला पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल 1970 को मनाया गया था, जबकि 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन ने इस विषय को वैश्विक स्तर पर नई दिशा दी। आज यह दिन दुनिया के 195 से अधिक देशों में मनाया जाता है और इसमें हर साल लगभग एक अरब लोग भाग लेते हैं, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है।

पृथ्वी दिवस 2026 की प्रमुख थीम और लक्ष्य:

  • वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य
  • कोयला और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना
  • स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देना

डॉ. शेर मोहम्मद ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि चेतना का संदेश है। यह हमें याद दिलाता है कि छोटे-छोटे प्रयास जैसे ऊर्जा की बचत, पेड़ लगाना, प्लास्टिक का कम उपयोग और जल संरक्षण भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ पृथ्वी के निर्माण में योगदान दें।

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