सीकर में पौधशाला में 40% पौधे सूखे मिले:मॉनिटरिंग में की लापरवाही; निवर्तमान सरपंच, VDO सहित 4 से पैनल्टी सहित होगी वसूली
सीकर में पौधशाला में 40% पौधे सूखे मिले:मॉनिटरिंग में की लापरवाही; निवर्तमान सरपंच, VDO सहित 4 से पैनल्टी सहित होगी वसूली
पलसाना : सीकर जिले में पलसाना पंचायत समिति की मंडा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में भारी लापरवाही सामने आई। पंचायत परिसर में तैयार हो रही पौधशाला (नर्सरी) में मॉनिटरिंग के अभाव में 40 प्रतिशत पौधे सूख गए। मामले में संज्ञान लेते हुए जिला परिषद सीकर के मनरेगा लोकपाल हरिराम ने प्रशासक (निवर्तमान सरपंच), ग्राम विकास अधिकारी (VDO), कनिष्ठ सहायक और कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA) सहित 4 लोगों को दोषी माना।
लोकपाल ने इन सभी पर कार्रवाई करते हुए नुकसान की राशि चारों दोषियों से समान रूप से वसूलने और 3 अधिकारियों पर जुर्माना लगाने के आदेश जारी किए।
मनरेगा लोकपाल हरिराम ने बताया- मामले की जांच के दौरान पत्रावलियों और सबूतों की गहनता से जांच की गई। मंडा पंचायत परिसर में पौधशाला तैयार करने का काम मंजूर हुआ था। इसके तहत 5 हजार पौधे लगाए गए थे, लेकिन अधिकारियों की ऑब्जर्वेशनल में लापरवाही के कारण 40% पौधे (करीब 2000) नष्ट हो गए थे।
चारों दोषियों से बराबर वसूली के आदेश
नियमों के मुताबिक- पौधरोपण में 20 प्रतिशत तक का ‘कैजुअल्टी फैक्टर’ (पौधों के प्राकृतिक रूप से नष्ट होने की दर) मान्य होती है। इस आधार पर शेष बचे 20 प्रतिशत पौधों के नुकसान को सीधे तौर पर कार्मिकों की लापरवाही माना गया। वहीं इसे राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों की अवहेलना भी माना गया। पौधशाला पर कुल 24 हजार 153 रुपए खर्च हुए थे। लोकपाल ने 20 प्रतिशत अतिरिक्त पौधों के मरने पर कुल खर्च का 20% यानी 4 हजार 830 रुपए को बर्बाद करना माना। इस पर 4 हजार 830 रुपए की राशि को चारों दोषी कार्मिकों से बराबर रूप से (1,207.50 रुपए प्रति व्यक्ति) वसूलने के आदेश दिए।
इन 4 कार्मिकों पर हुआ एक्शन, लिया जाएगा जुर्माना
मनरेगा अधिनियम 2005 की धारा 25 के तहत लोकपाल ने निम्नलिखित कार्रवाई के आदेश दिए हैं-
नेहा देवी (प्रशासक/निवर्तमान सरपंच): सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में 1,207.50 रुपए की वसूली कर राजकोष में जमा कराने के निर्देश दिए ग।
छीतरमल अहीर (ग्राम विकास अधिकारी – VDO): कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर इन पर 500 रुपए की शास्ति (जुर्माना) लगाई गई है। साथ ही 1 हजार 207.50 रुपए की वसूली भी की जाएगी।
भगवानसहाय बलाई (कनिष्ठ सहायक): इन पर भी 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। वहीं 1 हजार 207.50 रुपए की वसूली कर राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए गए।
डबकेश चौधरी (कनिष्ठ तकनीकी सहायक – JTA): तकनीकी पर्यवेक्षण में कोताही पर 500 रुपए का जुर्माना और 1 हजार 207.50 रुपए की वसूली का दंड लगाया गया है।
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