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शादियों के नाम पर खुला खेल! बिना परमिशन शराब, बिना पहचान कैटरिंग-कानून ताक पर, प्रशासन खामोश?


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शादियों के नाम पर खुला खेल! बिना परमिशन शराब, बिना पहचान कैटरिंग-कानून ताक पर, प्रशासन खामोश?

शादियों के नाम पर खुला खेल! बिना परमिशन शराब, बिना पहचान कैटरिंग-कानून ताक पर, प्रशासन खामोश?

जनमानस शेखावाटी सवंददाता : चंद्रकांत बंका

झुंझुनूं : जिले में शादी समारोह अब केवल सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि नियमों की खुलेआम अनदेखी का केंद्र बनते जा रहे हैं। विवाह समारोहों में बिना अनुमति शराब परोसना, बिना पहचान और मेडिकल जांच के कैटरिंग स्टाफ की तैनाती, और जीएसटी नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करते हैं।

बिना लाइसेंस शराब परोसने का खुला खेल

जानकारी के अनुसार अधिकांश शादी समारोहों में खुलेआम शराब के काउंटर लगाए जा रहे हैं। आबकारी नियमों के तहत किसी भी सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम में शराब परोसने के लिए वैध लाइसेंस अनिवार्य होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बिना अनुमति ही शराब परोसी जा रही है।
यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक और सुरक्षा दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है।

कैटरिंग व्यवस्था में भारी लापरवाही

शादी समारोहों में कार्यरत कैटरिंग कर्मचारियों की स्थिति भी चिंताजनक है।

  • अधिकांश कर्मचारियों के पास पहचान पत्र (आईडी) नहीं
  • निर्धारित ड्रेस कोड का अभाव
  • मेडिकल जांच या स्वास्थ्य प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं
  • प्रशिक्षण की कमी

ऐसे में बिना जांचे-परखे कर्मचारी सीधे खाद्य सामग्री के संपर्क में आ रहे हैं, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।

जीएसटी चोरी से सरकार को नुकसान

कैटरिंग और इवेंट सेवाओं में बड़े पैमाने पर जीएसटी नियमों की अनदेखी हो रही है।

  • बिना बिल भुगतान
  • फर्जी बिलिंग
  • वास्तविक आय छिपाना

इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जो कर चोरी की श्रेणी में आता है।

अवैध विवाह स्थल बने खतरा

शहर और आसपास कई मैरिज गार्डन एवं बैंक्वेट हॉल बिना वैध अनुमति संचालित हो रहे हैं।

  • फायर सेफ्टी इंतजामों का अभाव
  • पार्किंग और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था नहीं
  • आपातकालीन सुविधाओं की कमी

ये सभी खामियां किसी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद संबंधित विभाग-आबकारी, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग और जीएसटी अधिकारी अब तक ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। यह स्थिति लापरवाही या संभावित मिलीभगत की ओर संकेत करती है, जिससे आमजन में असंतोष बढ़ रहा है।

जरूरत सख्त कार्रवाई की

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अब प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए—

  • बिना लाइसेंस शराब परोसने वालों पर सख्त कार्रवाई
  • कैटरिंग कर्मचारियों के लिए आईडी, मेडिकल जांच और प्रशिक्षण अनिवार्य
  • जीएसटी चोरी पर कड़ी कार्रवाई
  • अवैध विवाह स्थलों को चिन्हित कर सील करना

यदि समय रहते इन अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।

अब देखना यह है कि झुंझुनूं प्रशासन जागता है या फिर किसी घटना के बाद ही कार्रवाई होती है।

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