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झुंझुनूं में कॉलेज गेट बंद होने पर रोने लगे कैंडिडेट्स:एसआई एग्जाम में दो मिनट की देरी में भी नहीं मिली एंट्री, बालों में भी जांच


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झुंझुनूं में कॉलेज गेट बंद होने पर रोने लगे कैंडिडेट्स:एसआई एग्जाम में दो मिनट की देरी में भी नहीं मिली एंट्री, बालों में भी जांच

झुंझुनूं में कॉलेज गेट बंद होने पर रोने लगे कैंडिडेट्स:एसआई एग्जाम में दो मिनट की देरी में भी नहीं मिली एंट्री, बालों में भी जांच

झुंझुनू : राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से रविवार को दो पारियों में आयोजित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा पुलिस और प्रशसन के लिए भी चुनौती बनी रही। झुंझुनू जिला मुख्यालय के आर आर (मोरारका) गर्वनमेंट कालेज के गेट के बाहर देरी से पहुंचे स्टूडेंट को वहीं पर रोक दिया गया। इस दौरान कैंडिंडेट्स रोने भी लगे लेकिन नियमों के चलते किसी को भी एंट्री नहीं दी गई। वहीं एग्जाम सेंटर के बाहर कड़ी सुरक्षा के बीच स्टूडेंट्स को एंट्री दी गई। यहां तक की मेटल डिटेक्टर से बालों तक की जांच की गई।

मुरारका कॉलेज के आगे 5 से 6 स्टूडेंट गार्ड से अंदर जाने की गुहार लगा रहे थे लेकिन उन्हें दाखिला नहीं दिया गया
मुरारका कॉलेज के आगे 5 से 6 स्टूडेंट गार्ड से अंदर जाने की गुहार लगा रहे थे लेकिन उन्हें दाखिला नहीं दिया गया

2 मिनट की देरी पर भी नहीं खोले सेंटर के गेट

मोरारका कॉलेज के बाहर सुबह 10 बजे के बाद भी कैंडिडेट्सस भागते-दौड़ते परीक्षा देने पहुंचते दिखे। प्रशासन के सख्त निर्देशों के बाद 10 बजे के बाद परीक्षा केंद्र का मेन गेट बंद कर दिया गया। तय समय से बाद पहुंचे कैंडिडेट्स की मिन्नतों के बाद भी एंट्री नहीं दी गई। एग्जाम सेंटर पर महज दो मिनट देरी से पहुंची साक्षी को सुरक्षाकर्मियों ने एंट्री देने से मना कर दिया। उसने सुरक्षाकर्मियोंसे हाथ जोड़कर एंट्री देने की रिक्वेस्ट की लेकिन गेट नहीं खुला। ऐसे ही गुढ़ागौड़जी के पंकज पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने आए थे लेकिन सेंटर पर 10:08 बजे पहुंचे। 8 मिनट की इस देरी के चलते उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया।

परीक्षा देने आए निधि और संपत ने आपबीती बताइए कि कैसे वह सिर्फ 10-15 मिनट लेट हुए और उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली
परीक्षा देने आए निधि और संपत ने आपबीती बताइए कि कैसे वह सिर्फ 10-15 मिनट लेट हुए और उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली

निधि और संपत भी परीक्षा केन्द्र पर 10 मिनट की देरी से पहुंचे थे। वहीं बिसाऊ के संपत प्रजापत भी चंद मिनटों के फासले से परीक्षा नहीं दे सके। गौरतलब है कि प्रशासन के सख्त निर्देश हैं कि तय समय से एक सेकंड की भी ढील नहीं दी जाएगी। परीक्षा केन्द्र पर निर्धारित समय पर नहीं पहुंचना मतलब प्रवेश निषेध।

फुल स्लीव्ज पर चली कैंची, आईडी की बारीकी से जांच

फर्जी केंडिडेट्स को परीक्षा में बैठने से रोकने और नकल पर नकेल कसने के लिए इस बार सुरक्षा के और भी ज्यादा पुख्ता इंतजाम किए गए। जिले के सभी 46 केंद्रों पर पुलिस का भारी जाब्ता तैनात रहा। परीक्षा केंद्रों पर ड्रेस कोड को लेकर कोई समझौता नहीं दिखा। प्रशासन ने केंद्रों के बाहर ही कैंची और चाकू का इंतजाम कर रखा था। जो कैंडिडेट्स पूरी बांह की कमीज और सूट पहनकर आए थे कैंची से उनकी आस्तीनें काट दी गईं। गले, हाथों–पांवों में बांधे धागे, गहने, कानों की बालियां और पांव से जूते भी निकलवा लिए गए। केंडिडेट्स को सेंटर में प्रवेश देने से पहले मेटल डिटेक्टर से जांच की गई। मूल पहचान पत्र और प्रवेश पत्र का बारीकी से मिलानकिया गया। इतनी सख्ती के बाद ही ‘ग्रीन सिग्नल’ दिय गया।

फ्लाइंग टीम लगातार करती रही मुआयना

जिले में परीक्षा केन्द्रों पर नकल रोकने के लिए 8 फ्लाइंग टीमें तैनात की गई थीं। इन टीमों ने लगातार परीक्षा केंद्रों पर कैंडिडेट्स पर नजर रखी ताकि परीक्षा की गोपनीयता बनी रहे।

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