सटीक हेल्थ चेकअप के लिए सीएसआईआर-सीरी ने बनाया ‘मेडिसिंक’:ईसीजी और ब्लड प्रेशर जांच में इस्तेमाल होगा, निजी कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की
सटीक हेल्थ चेकअप के लिए सीएसआईआर-सीरी ने बनाया ‘मेडिसिंक’:ईसीजी और ब्लड प्रेशर जांच में इस्तेमाल होगा, निजी कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की
पिलानी : पिलानी में स्थित केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीरी) ने मरीजों के हेल्थ चेकअप के क्षेत्र में एक हाईटेक डिवाइस बनाया है। इस डिवाइस के जरिए मरीजों के ईसीजी, ऑक्सीजन सैचुरेशन और ब्लड प्रेशर जैसी जांच पहले से ज्यादा सटीक तरीके से की जा सकती है।
गुरुवार को ‘मेडिसिंक’ नाम के इस डिवाइस की टेक्नोलॉजी को सीएसआईआर-सीरी ने मेसर्स वर्टेक्स मेडिटेक नाम की कंपनी को सौंप दिया है। अब ये कंपनी इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर प्रोडक्शन कर सकेगी।
स्वदेशी तकनीकें हेल्थ सिस्टम को और मजबूत करेंगी
इस दौरान सीएसआईआर-सीरी संस्थान के निदेशक डॉ. पीसी पंचारिया ने कहा- ‘मेडिसिंक’ जैसी स्वदेशी तकनीकें देश के डिजिटल हेल्थ सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करेंगी। इससे खासकर दूर-दराज के इलाकों में मरीजों की निगरानी करना आसान होगा। तकनीक हस्तांतरण के इस कार्यक्रम में वर्टेक्स मेडिटेक की ओर से संदीप मुद्गल और विवेक यादव मौजूद रहे। वहीं सीएसआईआर-सीरी की ओर से डॉ. नीरज कुमार और तकनीकी टीम के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।
मरीजों के सटीक चेकअप में सक्षम
‘मेडिसिंक’ एक स्मार्ट आईओटी आधारित सिस्टम है, जो मरीजों के कई जरूरी स्वास्थ्य संकेतों को माप सकता है। इसमें ईसीजी, ऑक्सीजन सैचुरेशन, पल्स रेट, ब्लड प्रेशर और शरीर का तापमान जैसे महत्वपूर्ण वाइटल्स की सटीक जानकारी मिलती है।
डॉक्टर कहीं से भी कर सकेंगे मरीज की निगरानी
यह सिस्टम मरीज के स्वास्थ्य से जुड़ा डेटा तुरंत क्लाउड के जरिए सर्वर पर भेज देता है। इससे डॉक्टर किसी भी जगह से मरीज की स्थिति देख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज से जुड़े निर्णय ले सकते हैं।
इस तकनीक को सीएसआईआर-सीरी के वैज्ञानिक डॉ. सत्यम श्रीवास्तव के नेतृत्व में विकसित किया गया है। इस टीम में सूरज मुखिया और आकाश वाघरे का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. सत्यम ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कम लागत में भरोसेमंद और आधुनिक मरीज मॉनीटरिंग सुविधा उपलब्ध कराना है।
संस्थान के पीआरओ अधिकारी रमेश बौरा ने बताया- तकनीक के हस्तांतरण से अब इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो सकेगा। इससे देश में स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा सुलभ बन सकेंगी।
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