‘डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से डरे नहीं’:मनोज मिल बोले- धोखाधड़ी होने पर घबराएं नहीं, तुरंत एक्शन लें
'डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से डरे नहीं':मनोज मिल बोले- धोखाधड़ी होने पर घबराएं नहीं, तुरंत एक्शन लें
झुंझुनूं : जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मिल ने कहा-अगर आपके साथ कोई ऑनलाइन धोखधड़ी होती है तो घबकराए नहीं। तुरंत एक्शन ले। दरअसल, सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान वे बोले- जिस रफ्तार से तकनीक बढ़ी है, उसी रफ्तार से ऑनलाइन ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे अपराध भी बढ़े हैं। ऐसे में उपभोक्ता की जागरूकता ही सबसे बड़ा कवच है।
ठगी होने पर तुरंत एक्शन लें
अगर आपके साथ कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो घबराकर बैठने के बजाय तुरंत एक्शन लें। 72 घंटे गोल्डन ऑवर होते हैं। आरबीआई के 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर के अनुसार, फ्रॉड होने के 72 घंटे के भीतर बैंक को सूचना देना अनिवार्य है। यदि आप समय पर सूचना देते हैं, तो रिकवरी और कार्रवाई की जिम्मेदारी बैंक की बढ़ जाती है और आपकी देनदारी सीमित हो जाती है।
बैंक खातों और ATM पर मिलता है मुफ्त बीमा
उन्होंने बताया कि लोगों को पता ही नहीं होता कि उनके बैंक खाते या कार्ड पर बीमा कवर भी है। उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष मनोज मील ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि ATM, सैलरी अकाउंट और केसीसी (KCC) धारकों को उनके बीमा की जानकारी लिखित में देना बैंक का कर्तव्य है। बैंक परिसर में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि किस कंपनी से बीमा है और क्लेम की प्रक्रिया क्या है। बीमा कवर की जानकारी होने से अदालतों में बेवजह के मुकदमों का बोझ कम होगा।
क्या बैंक आपका पूरा खाता फ्रीज कर सकता है?
अक्सर देखा गया है कि किसी विवादित ट्रांजैक्शन के कारण बैंक पूरा अकाउंट फ्रीज कर देते हैं। इस पर अध्यक्ष ने कानून साफ किया। पूरी राशि ब्लॉक करना गलत: माननीय उच्च न्यायालय के अनुसार, केवल विवादित राशि (Disputed Amount) को ही होल्ड किया जा सकता है। शेष राशि का उपयोग: खाते में मौजूद बाकी पैसों के लेनदेन पर बैंक रोक नहीं लगा सकता। लिखित सूचना जरूरी: अगर बैंक राशि होल्ड करता है, तो उसे उपभोक्ता को कारण सहित लिखित सूचना देनी होगी।
जिले में तैयार कर रहे हैं ठोस योजना तैयार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने बताया कि प्रशासन, पुलिस और बैंकिंग तंत्र के समन्वय से जिले में एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उपभोक्ता अपने अधिकारों को पहचानें, क्योंकि कानून आपकी सुरक्षा के लिए तैयार खड़ा है।
साइबर सुरक्षा के लिए 5 मंत्र
- कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही ओटीपी (OTP) साझा करें।
- पुलिस या कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर आपको ‘अरेस्ट’ नहीं करती। यह केवल डराने का तरीका है।
- तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
- संबंधित बैंक मैनेजर को तुरंत ईमेल या लिखित शिकायत दें।
- बिना पढ़े किसी भी डिजिटल दस्तावेज या ऐप को परमिशन न दें। |
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